सुंजवान आर्मी कैंप हमला: जानें शहीद मदन चौधरी के बेटे अंकुश चौधरी के बारे में जो देश की सेवा के लिए हो रहे हैं तैयार

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जम्‍मू। सुंजवान स्थित आर्मी कैंप पर हुए आतंकी हमले में जेसीओ मदन लाल चौधरी जिनकी उम्र 50 वर्ष थी, शहीद होने वाले सबसे पहले सैनिक थे। जिस समय आतंकियों ने हमला बोला सूबेदार मदन लाल निहत्‍थे थे और आतंकियों ने उन पर एक के बाद एक कई गोलियां बरसाई। इसके बावजूद सूबेदार मदन लाल पूरी ताकत के साथ अपने परिवार की जान बचाने की कोशिशों में लगे रहे थे। मंगलवार को शहीद मदन लाल चौधरी का कठुआ के हीरानगर में अंतिम संस्‍कार किया गया। शहीद मदन लाल के बेटे अंकुश चौधरी की आंखों में अपने पिता के जाने का गम था तो वहीं एक जज्‍बा था कि वह देश के दुश्‍मनों को एक दिन जरूर सबक सिखाएंगे। अगर आप जानना चाहते हैं कि अंकुश चौधरी कौन हैं और क्‍यों आखिरी उनकी आंखों में लोगों ने वह जज्‍बा महसूस किया जो एक आम नागरिक की आंखों में कभी-क‍भी ही देखने को मिलता है, तो आपको बता दें कि अंकुश एक जेंटलमैन कैडेट (जीसी) हैं। वह सिंकदराबाद स्थित मिलिट्री कॉलेज ऑफ इलेक्ट्रिॉनिक एंड मैकेनिकल इंजीनियरिंग से पढ़ाई कर रहे हैं।

पिता की शहादत को बेटे का सलाम

पिता की शहादत को बेटे का सलाम

कैडेट अंकुश चौधरी जब अपने पिता के अंतिम संस्‍कार के लिए पहुंचे थे उनकी आंखों में पिता के जाने की तकलीफ थी और उतना ही ज्‍यादा गुस्‍सा भी था। वह अपने पिता की शहादत को सैल्‍यूट करने आए थे। एक शांत युवा नजर आने वाले अंकुश चौधरी की एक ठहराव भी नजर आ रहा था। अंकुश बार-बार अपनी मां और दादी को संभाल रहे थे। लेकिन पाकिस्‍तान को लेकर उनमें एक गुस्‍सा भी था। अंकुश के साथ ही कुछ दिनों बाद देश को एक और युवा ऑफिसर मिलने वाला है।

 क्‍वार्टर में नहीं घुस सके आतंकी

क्‍वार्टर में नहीं घुस सके आतंकी

सूबेदार मदन चौधरी के भाई सुरिंदर चौधरी ने बताया कि उन्होंने ढेर सारा साहस जुटाया और आतंकवादियों को अपने क्वार्टर में नहीं घुसने दिया एवं इस तरह परिवार के अन्य सदस्यों की जान बचायी। हालांकि मदन लाल चौधरी की 20 वर्षीय बेटी नेहा के पैर में गोली लग गयी और उनकी अन्य रिश्तेदार परमजीत भी घायल हो गईं। लेकिन सभी अपनी जान बचाने में कामयाब रहे।

दुश्‍मनों से बिना हथियार भिड़े सूबेदार

दुश्‍मनों से बिना हथियार भिड़े सूबेदार

भाई की शहादत पर गर्व सुरिंदर चौधरी ने कहा कि उन्‍हें अपने छोटे भाई पर गर्व है जिसने बहादुरी से गोलियों का सामना किया, परिवार के सदस्यों और रिश्तेदारों को बचाने के लिए निहत्थे ही सशस्त्र आतंकवादियों से लोहा लिया। उन्‍होंने बताया कि अगर वह उन्‍हें बचाने में असफल हो जाते तो पूरा परिवार आतंकी हमले की भेंट चढ़ जाता। उन्‍होंने न सिर्फ परिवार की जान बचाई बल्कि ज्‍यादा से ज्‍यादा लोगों को नुकसान पहुंचाने के आतंकवादियों के मंसूबे पर पानी फेर दिया।

गांव में भी फैली शोक की लहर

गांव में भी फैली शोक की लहर

3,000 जवानों परिवार कैंप में शनिवार को आतंकियों ने सुंजवान में आर्मी कैंप में स्थित जिस जगह पर हमला किया वहां पर करीब 3,000 जवानों के परिवार रहते हैं। मदन लाल चौधरी कठुआ के हीरानगर के रहने वाले थे। उनके गांव में जैसे ही उनकी शहादत की खबर फैली, गांव में शोक की लहर दौड़ गई। हमले से पहले सूबेदार चौधरी का परिवार उनके क्‍वार्टर आया था क्‍योंकि एक रिश्‍तेदार के यहां शादी के लिए उन्‍हें कुछ खरीदारी करनी थी।

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English summary
Sunjuwan Army Camp terror attack Martyr Madan Lal Choudhary's son all set to serve the nation.

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