त्रिपुरा: BJP के 'चाणक्य' सुनील देवधर बोले- 'सूअर का मांस खाकर बनाई लोगों के दिलों में जगह'
नई दिल्ली। त्रिपुरा में बीजेपी को शानदार जीत दिलाने में दो लोगों का अहम हाथ पहले राज्य के नए सीएम बिप्लव देब का और दूसरे भाजपा के त्रिपुरा प्रभारी सुनील देवधर का। इस शानदार प्रदर्शन का सबसे अधिक क्रेडिट सुनील देवधर को मिल रहा है। त्रिपुरा में बीजेपी की जीत कोई रातों-रात हुआ करिश्मा नहीं बल्कि बीते साढ़े तीन साल में सुनील देवधर द्वारा की गई मेहनत का नतीजा है। माना जा रहा है कि त्रिपुरा की विजय के बाद बीजेपी अब सुनील देवधर को तेलंगाना में पार्टी संगठन की कमान सौंपने वाली है।

सूअर का मांस खाकर बनाई लोगों के दिलों में जगह
महाराष्ट्र के रहने वाले सुनील देवधर अपनी सोशल इंजिनियरिंग और बूथ लेवल मैनेजमेंट के लिए मशहूर हैं। देवधर 2014 के लोकसभा चुनाव में वाराणसी सीट पर पीएम मोदी के चुनाव प्रबंधक भी रह चुके हैं। त्रिपुरा में जीत पर सुनील देवधर ने हिंदी न्यूज़ चैनल आज तक से बात करते हुए बताया कि राज्य में संगठन खड़ा करने के लिए उन्होंने खुद पर बहुत काम किया। सुनील देवधर ने कहा कि उन्हें अपनी फूड हैबिट तक में भी बदलाव करना पड़ा। बीजेपी नेता ने बताया कि उन्हें यहां पोर्क यानि सूअर का मांस भी खाना पड़ा।

मछली न खाने की खाई थी कसम
देवधर के मुताबिक उन्हें बंगाली मछली बहुत पंसद है लेकिन सावन के महीने में धार्मिक कारणों से मैंने इसे खाना छोड़ा था। मानसून में मछली खाना छोड़ने के साथ ही मैंने प्रण लिया था कि राज्य में लेफ्ट की शिकस्त के बाद ही मैं दोबारा मछली खाऊंगा। उस वक्त विरोधियों ने उपहास किया था कि इस साल ऐसा नहीं होगा और फिर मुझे 5-6 साल तक मछली खाना नसीब नहीं होगी। मैं अपने विश्वास पर डटा रहा और जिसे कांग्रेस वहीं कभी नहीं कर पाई उसे मैंने तीन साल में पूरी कर दिखाया और त्रिपुरा में लेफ्ट की शिकस्त के बाद मैंने 4 मार्च को मछली खाई।

लेफ्ट के गढ़ में कमल का उदय
बता दें कि बीजेपी ने त्रिपुरा में 25 साल पुराने सीपीएम के गढ़ को बुरी तरह से ध्वस्त कर दिया है। वामपंथी शासन का खात्मा करते हुए धमाकेदार जीत दर्ज की है। 2013 के त्रिपुरा विधानसभा चुनाव में भाजपा को महज डेढ़ फीसद वोट मिले थे जबकि इस बार 43 फीसद। शुक्रवार को त्रिपुरा भाजपा विधायक दल के नेता बिप्लब देब मुख्यमंत्री पद की शपथ लेंगे।












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