सुब्रमण्यम स्वामी ने सीडीएस बिपिन रावत के हेलीकॉप्टर पर लेजर हमले की जताई आशंका, सुनिए क्या बोले
नई दिल्ली,8 दिसंबर: भारतीय वायुसेना ने चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ जनरल बिपिन रावत और उनकी पत्नी समेत कुल 13 लोगों की तमिलनाडु में हुए हेलीकॉप्टर हादसे में मौत की पुष्टि कर दी है। लेकिन, इस दुखद खबर की घोषणा होने से पहले ही राज्यसभा सांसद सुब्रमण्यम स्वामी ने इस घटना के पीछे बहुत बड़ी विदेशी साजिश की आशंका जता दी है। उन्होंने एक यूट्यूब चैनल को दिए इंटरव्यू में कहा है कि जनरल रावत चीन को लेकर बहुत ही स्पष्टता से अपनी बात रखते थे। उन्होंने यह भी आशंका जताई है कि शायद भारत अभी तक चीन को बहुत हल्के में ले रहा है।

हेलीकॉप्टर हादसे को लेकर स्वामी ने जताई साजिश की आशंका
पिछले कुछ समय से केंद्र में सत्ताधारी नरेंद्र मोदी सरकार की कड़ी आलोचना कर रहे राज्यसभा सांसद सुब्रमण्यम स्वामी ने तमिलनाडु में बुधवार को हुए भारतीय वायुसेना के हेलीकॉप्टर एमआई-17वी5 क्रैश को लेकर बहुत बड़ी साजिश की आशंका जताकर सनसनी मचा दी है। उन्होंने कहा है कि सीडीएस जनरल बिपिन रावत सेना के उन चुनिंदा टॉप लेवल के अधिकारियों में शामिल थे, जो सरकार से नहीं डरते थे और चीन को लेकर अपनी भावनाएं खुलकर जताते थे। उन्होंने आशंका जताई कि हो सकता है कि हेलीकॉप्टर के साथ हादसा ना हुआ हो और उसे निशाना बनाया गया हो। उन्होंने साइबर वॉरफेयर की ओर आशंका जताकर इस घटना को लेकर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं।

हेलीकॉप्टर पर हो सकता है लेजर हमला- स्वामी
पीगुरुज नाम के एक यूट्यूब चैनल पर सुब्रमण्यम स्वामी ने जनरल रावत, उनकी पत्नी और बाकी सैन्य कर्मियों के निधन की खबर से पहले ही कहा था कि 'वह (जनरल रावत) आर्मी में उस स्तर पर उन कुछ चुनिंदा लोगों में से थे जो सरकार से नहीं डरते थे और कहते रहे थे कि चीन दुश्मन है....चीन एक खतरा है....चीन हमारे इलाके में दाखिल हुआ.....' स्वामी ने आशंका जताते हुए बड़ी साजिश की ओर इशारा करते हुए कहा, 'तमिलनाडु में एक हेलीकॉप्टर में टेकऑफ के बाद आग लग जाती है या इसी तरह का कुछ......मुझे उतनी समझ तो नहीं है, लेकिन यह साइबर वॉरफेयर की ओर ध्यान ले जाता है....साइबर वॉरफेयर में एक लेजर से ऑब्जेक्ट को जलाया जाता है......'

वायुसेना ने की हेलीकॉप्टर हादसे में जनरल रावत के निधन की पुष्टि
बता दें कि इसके बाद वायुसेना ने इस दुखद हादसे में 13 लोगों की दुखद मौत की पुष्टि कर दी है। ट्विटर पर वायुसेना ने इसकी घोषणा करते हुए लिखा, 'बहुत ही दुख के साथ अब यह पता चला है कि इस दुर्भाग्यपूर्ण हादसे में जनरल बिपिन रावत, श्रीमती मधुलिका रावत और उसमें सवार 11 अन्य लोगों का निधन हो गया है।' एयर फोर्स के मुताबिक इस हेलीकॉप्टर में सवार ग्रुप कैप्टन वरुण सिंह जख्मी हुए हैं और इस समय उनका इलाज वेलिंगटन के मिलिट्री हॉस्पिटल में चल रहा है। जनरल बिपिन रावत वेलिंगटन (नीलगिरी पहाड़) स्थित डिफेंस सर्विस स्टाफ कॉलेज में स्टूडेंट ऑफिसरों और फैक्लटी को संबोधित करने के लिए गए थे।
'हमने चीन के खतरे को बहुत ही हल्के में लिया है'
सुब्रमण्यम स्वामी ने यह भी कहा है कि 'इसका मतलब है कि हम बहुत ज्यादा खतरे में हैं.....और हमने चीन के खतरे को बहुत ही हल्के में लिया है.....अब राष्ट्र की अखंडता सवालों में है....' उन्होंने राष्ट्रीय सुरक्षा पर नए सिरे से विचार करने की जरूरत भी बताई है। गौतलब है कि एक दिन पहले ही सीडीएस बिपिन रावत ने बायोलॉजिकल वॉर की आशंका जताई थी। (यह इंटरव्यू मौत की पुष्टि से पहले का है)

भारत के पहले सीडीएस थे जनरल बिपिन रावत
थल सेना प्रमुख के पद से जनरल बिपिन रावत के रिटायर होने से ठीक पहले ही केंद्र सरकार ने सीडीएस का पद बनाया था और 30 दिसंबर, 2019 को उनकी पहले सीडीएस के तौर पर नियुक्ति की घोषणा कर दी गई और यह आदेश 31 दिसंबर, 2019 से प्रभावी हो गया। यानी पहली बार देश के तीनों सेनाओं के चीफ के पद पर रहते हुए उनके इसी महीने साल के आखिरी दिन दो साल पूरे होने वाले थे, लेकिन उससे पहले ही इतना बड़ा दर्दनाक हादसा हो गया।

जिस बटालियन में पिता थे, उसी में शामिल हुए
सीडीएस का पद मिलिट्री से संबंधित मामलों में सरकार के लिए वन-प्वाइंट एडवाइजर के रूप में है, जिसका मुख्य लक्ष्य तीनों सेनाओं - थल सेना, नौसेना और वायु सेना को एकीकृत करना है। सीडीएस को स्थाई चीफ ऑफ स्टाफ कमिटी (सीओएससी) भी बनाया गया है। जनरल रावत ने 2016 में 17 दिसंबर को तत्कालीन आर्मी चीफ जनरल दलबीर सिंह सुहाग से 27वें चीफ ऑफ आर्मी स्टाफ का पदभार लिया था। वे एनडीए और आएमए के पूर्व छात्र रहे हैं और 1978 के दिसंबर में 11 गोरखा राइफल्स के उसी पांचवीं बटालियम में शामिल हुए थे, जिसमें उनके पिता भी योगदान दे चुके थे।

ये सारी अहम जिम्मेदारियां संभाल चुके थे बिपिन रावत
भारत के पहले सीडीएस काउंटरइंसर्जेंसी वॉरफेयर के काफी अनुभवी जनरल थे और भारत के उत्तरी और पूर्वी कमांड समेत कुछ सबसे मुश्किल इलाकों में अपनी सेवाएं दे चुके थे। सीडीएस बनने से पहले अपनी चार दशकों की सेवा में जनरल रावत आर्मी चीफ के अलावा ब्रिगेड कमांडर, जनरल ऑफिसर कमांडिंग इन चीफ-साउदर्न कमांड,मिलिट्री सेक्रेटरी ब्रांच में जनरल स्टाफ ऑफिसर ग्रेड 2 और जूनियर कमांडिंग विंग में सीनियर इंस्ट्रक्टर की भूमिका निभा चुके थे। वे यूनाइटेड नेशनल पीसकीपिंग फोर्स में भी रहे थे और डेमोक्रेटिक रिपब्लिक ऑफ कांगो में मल्टीनेशनल ब्रिगेड के कमांडर रहे थे। गोरखा ब्रिगेड से चीफ ऑफ आर्मी स्टाफ बनने वाले चौथे ऑफिसर होने से पहले रावत वाइस चीफ ऑफ आर्मी स्टाफ के पद पर भी तैनात थे












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