BJP को TATA से मिले 356 करोड़ के चंदे पर स्वामी ने उठाए सवाल.....कॉन्फ्लिक्ट ऑफ इंट्रेस्ट होगा

नई दिल्ली- 2018-19 में बीजेपी को भारत के कॉर्पोरेट सेक्टर से इलेक्ट्रोल ट्रस्ट के जरिए जो चंदा मिला, उसमें 75 फीसदी हिस्सा अकेले टाटा ग्रुप नियंत्रित प्रोग्रेसिव इलेक्ट्रोल ट्रस्ट का रहा। बीजेपी के राज्यसभा सांसद सुब्रमण्यम स्वामी ने इसी पर सवाल उठा दिए हैं, क्योंकि टाटा ग्रुप एयर इंडिया के लिए बोली लगाने की तैयारी में है। भारत में एयर इंडिया की शुरुआत भी इसी ग्रुप ने की थी और अब वह एविएशन क्षेत्र में अपना विस्तार करने के लिए इसमें दिलचस्पी दिखा रहा है। भाजपा को इलेक्ट्रोल ट्रस्ट के जरिए मिले बाकी 25 फीसदी चंदे में कई ट्रस्टों की हिस्सेदारी है, जिनमें प्रूडेंट इलेक्ट्रोल ट्रस्ट भी शामिल है।

भाजपा को टाटा की ट्रस्ट से मिले 356 करोड़ रुपये

भाजपा को टाटा की ट्रस्ट से मिले 356 करोड़ रुपये

बीजेपी ने चुनाव आयोग से जो जानकारी साझा की है उसके मुताबिक 2018-19 में पार्टी को कॉर्पोरेट जगत से कुल 472 करोड़ रुपये बतौर चंदा मिला। इसमें से 356 करोड़ रुपया अकेले टाटा ग्रुप नियंत्रित प्रोग्रेसिव इलेक्ट्रोल ट्रस्ट (पीईटी) ने दिए। स्वामी ने इसी पर सवाल पूछा है। जबकि, कांग्रेस को इस ट्रस्ट से इसी अवधि में महज 55.6 करोड़ रुपये मिले हैं। पीईटी ने तृणमूल कांग्रेस को भी 43 करोड़ रुपये का चंदा दिया है, जबकि पिछले वित्त वर्ष उसे एक भी पैसा चंदा नहीं दिया था। वहीं प्रूडेंट इलेक्ट्रोल ट्रस्ट ने 2018-19 में सत्ताधारी बीजेपी को महज 67.3 करोड़ रुपये दान में दिए हैं, जो कि उससे पिछले वित्त वर्ष में मिले 154 करोड़ से आधे से भी कम है। इस ट्रस्ट में सबसे ज्याद योगदान भारती एयरटेल ग्रुप का होता है। वहीं आदित्य बिड़ला ग्रुप के एबी जेनरल इलेक्ट्रोल ट्रस्ट ने भाजपा को 12.5 करोड़ और एक करोड़ रुपये कांग्रेस को दिए हैं। इनके अलावा हारमनी इलेक्ट्रोल ट्रस्ट ने बीजेपी को 10 करोड़, ट्रिंफ इलेक्ट्रोल ट्रस्ट ने 5 करोड़, न्यू डेमोक्रेटिक इलेक्ट्रोल ट्रस्ट और जनहित इलेक्ट्रोल ट्रस्ट ने ढाई-ढाई करोड़ रुपये बतौर चंदा पार्टी फंड में डाला है।

स्वामी के सवाल

बीजेपी सांसद सुब्रमण्यम स्वामी ने टाटा ग्रुप नियंत्रित प्रोग्रेसिव इलेक्ट्रोल ट्रस्ट से भाजपा को मिली चंदे की रकम में इसी इजाफे पर सवाल उठाया है। उन्होंने ट्वीट करके लिखा है कि 'यानि टाटा ने बीजेपी को चंदे के रूप में बहुत बड़ी रकम दी है। इसलिए, अगर यह उसे एयर इंडिया सौंपती है तो यह कॉन्फ्लिक्ट ऑफ इंट्रेस्ट माना जाएगा।' स्वामी के इस ट्वीट को खबर लिखे जाने तक करीब डेढ़ हजार रीट्वीट और 10 हजार से ज्यादा लाइक्स मिल चुके हैं।

क्या है मामला?

क्या है मामला?

गौरतलब है कि 87 वर्ष पहले टाटा ग्रुप ने ही एयर इंडिया की शुरुआत की थी। लेकिन, बाद में उसे इसे छोड़ना पड़ गया था। हाल के महीनों में केंद्र सरकार ने संकेत दिए हैं कि वह एयर इंडिया का स्वामित्व पूरी तरह से छोड़ना चाहती है। तब टाटा ग्रुप की ओर से यह इच्छा जताई गइ कि अगर सरकार ऐसा करती है तो वो बोली लगाने पर विचार करेगी। इससे पहले पिछले साल सरकार ने एयर इंडिया में 76% विनिवेश की कोशिश की थी तो टाटा ने उसमें दिलचस्पी नहीं दिखाई। माना जा रहा है कि अगर टाटा ग्रुप एयर इंडिया को खरीद लेता है तो उसके एविएशन बिजनेस को काफी बढ़ावा मिल सकता है।

भाजपा को चंदे में मिले 743 करोड़ से ज्यादा

भाजपा को चंदे में मिले 743 करोड़ से ज्यादा

दुनिया का सबसे बड़ा राजनीतिक दल और केंद्र में सरकार चला रही भारतीय जनता पार्टी को वित्त वर्ष 2018-19 में 20,000 रुपये से अधिक का 743 करोड़ रुपये बतौर चंदा मिला है। यह राशि कांग्रेस समेत छह राष्ट्रीय दलों को प्राप्त हुई चंदे की राशि से तीन गुना अधिक है। पार्टी को चंदे की यह राशि इस साल मई में हुए लोकसभा चुनावों से पहले मिली थी। भाजपा ने चंदे की जानकारी 31 अक्टूबर को चुनाव आयोग में दी थी, जिसे सोमवार को सार्वजनिक किया गया। कांग्रेस को चुनावी दान में 147 करोड़ रुपये मिले हैं। यह राशि भाजपा को मिले चंदे का सिर्फ पांचवा हिस्सा ही है।

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