स्टडी में दावा- गहन वायु प्रदूषण वाले शहरों में कोरोना से हुईं अधिक मौतें
नई दिल्ली, जून 25: कोरोना महामरी की दूसरी लहर में महाराष्ट्र सबसे अधिक प्रभावित होने वाला राज्य है। इसी बीच अपनी तरह का पहली पैन इंडिया स्टडी सामने आई है, जिसमें कहा गया है कि, मुंबई और पुणे ऐसे हॉटस्पॉट में से हैं जहां परिवहन और औद्योगिक क्षेत्रों के चलते एयर पॉल्यूशन बहुत अधिक है। स्टडी में कहा गया है कि, वायु प्रदूषण के चलते कोरोना के अधिक मामले सामने आए हैं और मौतें भी अधिक हुई हैं।

'मानवजनित उत्सर्जन स्रोतों और वायु गुणवत्ता डेटा के आधार पर भारत में सूक्ष्म कण पदार्थ (पीएम2.5) क्षेत्रों और कोविड-19 के बीच एक लिंक स्थापित करना' शीर्षक के अध्ययन में बताया गया है कि कैसे अत्यधिक प्रदूषित क्षेत्रों में रहने वाले लोग कोरोनो वायरस संक्रमण के प्रति अधिक संवेदनशील होते हैं। यह अध्ययन उत्कल विश्वविद्यालय, भुवनेश्वर से डॉ सरोज कुमार साहू और पूनम मंगराज, वरिष्ठ वैज्ञानिक गुफरान बेग और सुवर्णा टिकले- भारतीय उष्णकटिबंधीय मौसम विज्ञान संस्थान-पुणे; भीष्म त्यागी, राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान, राउरकेला; और वी. विनोज, भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान, भुवनेश्वर द्वारा किया गया है।
अध्ययन में मार्च 2020 से नवंबर 2020 तक कोविड-19 मामलों का अध्ययन किया गया। इस अध्यन में मुंबई और पुणे समेत 16 शहरों के आंकड़े शामिल किए गए। अध्ययन में पता चला है कि, परिवहन और औद्योगिक गतिविधियों में भारी मात्रा में जीवाश्म ईंधन जैसे पेट्रोल, डीजल और कोयले का उपयोग करने वाले क्षेत्रों में अधिक कोविड -19 मामलों की संख्या देखने को मिली।
अध्ययन से संकेत मिले हैं कि महाराष्ट्र, उत्तर प्रदेश, दिल्ली और गुजरात जैसे राज्यों में कोविड-19 मामलों की अधिक संख्या देखने को मिली। इन राज्यों में लोग लंबे समय तक 2.5 PM की उच्च सांद्रता के संपर्क में अपेक्षाकृत अधिक रहे हैं, खासकर शहरों में जहां जीवाश्म ईंधन का अत्यधिक उपयोग होता है। डॉ साहू ने कहा कि, हमारे द्वारा विकसित राष्ट्रीय उत्सर्जन सूची में उत्तर प्रदेश देश में सबसे अधिक उत्सर्जन भार वाला राज्य है।इसके बाद महाराष्ट्र का नंबर आता है। महाराष्ट्र का उत्सर्जन भार - 828.3 गीगाग्राम प्रति वर्ष है।












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