महागठबंधन के कारण बिहार-यूपी में गिरेगा एनडीए का स्ट्राइक रेट
नई दिल्ली। उत्तर प्रदेश और बिहार में लोकसभा की 120 सीटें हैं। इनमें से 2014 में एनडीए ने 104 सीटें जीती थीं। अब जबकि कई दल एनडीए छोड़ चुके हैं और जेडीयू एनडीए में आ चुका है तब भी स्थिति कमोबेश एक जैसी है। एनडीए के पास मौजूद सीटों में महज एक सीट का फर्क पड़ा है। उपचुनाव नतीजों के बाद भी आंकड़ा एनडीए के लिए 100 पर आ ठहरता है। तब भी 120 में 100 सीट का मतलब 83 फीसदी से ज्यादा का स्ट्राइक रेट। सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या एनडीए यह स्ट्राइक रेट बनाए रख सकता है? क्योंकि इसी बात से तय होगा कि केन्द्र में एनडीए की सरकार बनेगी या नहीं।

स्ट्राइक रेट बचाने के लिए बीजेपी ने टेके घुटने
83 फीसदी वाले स्ट्राइक रेट को बरकरार रखने के मकसद से ही एनडीए ने बिहार में जेडीयू को अपने साथ जोड़ा। इस वजह से आरएलएसपी और हम जैसी पार्टियों को बीजेपी ने अपने से दूर जाने दिया। बीजेपी खुद ऐसा नहीं चाहती थी, लेकिन जेडीयू की इच्छानुसार बीजेपी ने उन दलों से पीछा छुड़ाया। यहां तक कि 2019 के लिए बिहार में जेडीयू से घुटने टेककर समझौता करने की गरज भी इसी मकसद के कारण पैदा हुई। बीजेपी ने एनडीए के स्ट्राइक रेट को बरकरार रखने के लिए दो सीटों वाले जेडीयू को 17 सीटें दे दी और खुद 22 सीटों के बजाए अपने लिए 17 सीटों पर चुनाव लड़ना कबूल किया। यह स्ट्राइक रेट की ही चिन्ता थी कि बीजेपी ने गिरिराज सिंह की नवादा सीट को जेडीयू के हवाले कर दिया और उन्हें बेगूसराय से लड़ने को मजबूरकिया। यह वही चिन्ता थी कि भागलपुर से शाहनवाज़ हुसैन का टिकट तक काट देना पड़ा।

बिहार में एनडीए का स्ट्राइक रेट 50 फीसदी रहने के आसार
बिहार में स्ट्राइक रेट की चिन्ता कर रही एनडीए इस तथ्य के बावजूद कांटे की टक्कर में दिख रहा है कि उसके मुकाबले मजबूत महागठबंधन बनकर खड़ा हो चुका है। ऐसे ही गठबंधन के सामने बीजेपी को 2015 के विधानसभा चुनाव में करारी हार का सामना करना पड़ा था। दरअसल एनडीए के ख़िलाफ़ महागठबंधन की सोच बिहार में ही पैदा हुई थी। माना यही जा रहा है कि बिहार में एनडीए के लिए जीतने की स्ट्राइक रेट 83 पर्सेन्ट के बजाए 50 फीसदी के आसपास आकर ठहर जाएगी। यानी मुकाबला बराबरी का है या फिर थोड़े-बहुत फायदे में एनडीए नज़र आ सकता है।

2014 में यूपी में थी एनडीए की स्ट्राइक रेट 91.25 फीसदी
मगर, यूपी में स्थिति भिन्न है। यूपी में एसपी-बीएसपी पहली बार एकजुट होकर चुनाव लड़ रही हैं। उसने रालोद को भी अपने साथ जोड़ लिया है। इससे बीजेपी की मारक क्षमता ज़बरदस्त तरीके से प्रभावित होती दिख रही है। कांग्रेस की मौजूदगी को बीजेपी के लिए खुश होने की वजह इसलिए नहीं माना जा सकता क्योंकि विगत 2014 के चुनाव में भी कांग्रेस अकेली ही चुनाव मैदान में थी। एनडीए ने अपना दल और सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी के साथ गठबंधन किया था। यह गठबंधन 2019 में भी बरकरार है। कोई नया दल एनडीए अपने साथ नहीं जोड़ पाया है। ऐसे में 80 सीटों में से 73 सीट जीतने का करिश्मा यानी 91.25 फीसदी की मारक क्षमता को बरकरार रखना बीजेपी के लिए मुश्किल ही नहीं असम्भव है।

यूपी में महागठबंधन का स्ट्राइक रेट 64 फीसदी सम्भव
यूपी के चुनाव में सबसे अधिक स्ट्राइक रेट बीएसपी का रहने वाला है। वह 38 सीटों पर चुनाव लड़ रही है। महागठबंधन की वजह से मुसलमान वोटों का एकमुश्त फायदा उसे होता दिख रहा है। अगर जाट वोट ट्रांसफर न भी हो, तब भी एसपी का पिछड़ा और अपना खिसका हुआ दलित वोट का कुछ हिस्सा भी वापस लौटा, तो बीएसपी का स्ट्राइक रेट 80 फीसदी तक हो सकता है। इसका मतलब ये है कि अकेले बीएसपी 31 सीटें जीत सकती है। आरएलडी भी मुजफ्फरनगर और बागपत की सीट स्पष्ट रूप से जीतती दिख रही है। मथुरा पर कांटे की टक्कर रहेगी। यानी आरएलडी का स्ट्राइक रेट कम से कम 66 फीसदी रहने वाला है। वहीं, समाजवादी पार्टी महागठबंधन में सबसे कम स्ट्राइक रेट के साथ सामने आने वाली है। इसकी वजह पूर्वी यूपी में त्रिकोणात्मक संघर्ष है जहां समाजवादी के ज्यादातर उम्मीदवार हैं। 37 सीटें समाजवादी पार्टी लड़ रही हैं। समाजवादी पार्टी का स्ट्राइक रेट 40 फीसदी तक रहने का अनुमान लगाया जा सकता है। इसका मतलब ये हुआ कि एसपी को 14 से 15 सीटें मिल सकती हैं।इस तरह महागठबंधन में बीएसपी को 31, आरएलडी को 2 और एसपी को 15 यानी 48 सीटें मिलने वाली हैं ऐसा कहा जा सकता है। इसमें एक-दो सीटें और भी जुड़ जाएं तो आश्चर्य नहीं होना चाहिए। इसका मतलब ये है कि महागठबंधन का स्ट्राइक रेट 64 फीसदी रह सकता है। अब कांग्रेस के नजरिए से सोचें तो अधिक सीटों पर लड़ने की वजह से कांग्रेस का स्ट्राइक रेट बहुत अधिक नहीं रहने वाला है। यह उल्लेखनीय नहीं रहेगा। पार्टी अपनी संख्या 6 सीट के ऊपर जितनी ज्यादा ले जा सकेगी, उसे आज की तारीख में उपलब्धि माना जाएगा।

बिहार-यूपी में गणित गड़बड़ाया तो बढ़ेगी एनडीए की मुश्किलें
मतलब साफ है कि बीजेपी या एनडीए की स्ट्राइक रेट यूपी में 30 फीसदी तक आ टिकेगी। इसका मतलब ये होगा कि वह 27 सीटें जीतती हुई दिख रही है। बिहार में अगर एनडीए को 22 सीट मान लेते हैं तो कुल योग होता है 49. अब अगर 120 सीटों से तुलना करें तो एनडीए को 71 सीटों का नुकसान बिहार और यूपी से उठाना पड़ेगा। स्ट्राइक रेट के नजरिए से देखें तो यह 41 फीसदी पर आ टिकता है।अगर एनडीए को 2014 के आम चुनाव में मिली 336 सीटों से तुलना करें, तो कुल योग 336-71= 265 पर आ टिकता है। इसका मतलब ये हुआ कि बिहार-यूपी में हुए नुकसान के अलावा भी 7 सीटों की भरपाई बीजेपी को देश के शेष हिस्सों से करनी पड़ेगी। सवाल ये है कि क्या ऐसा मुमकिन है? अगर बीजेपी के नारे में यकीन करें तो मोदी है तो मुमकिन है। देखते हैं कि ये नारा चुनाव के गणित पर सही बैठता है या नहीं।












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