Dog Day: भारत के इस गांव में आवारा कुत्ते हैं 5 करोड़ की जमीन के मालिक, 'ठाटबाट' से गुजारते हैं जिंदगी

नई दिल्ली: पूरी दुनिया आज यानी 26 अगस्त को हर साल इंटरनेशनल डॉग डे के रूप में मनाती है। इस खास दिन की शुरुआत डॉग ट्रेनर और पशु बचाव अधिवक्ता कोलीन पेज ने की थी। उन्होंने नेशनल पपी डे, नेशनल कैट डे और राष्ट्रीय वन्यजीव दिवस की भी शुरुआत की। कोलीन ने 26 अगस्त को एक कुत्ते को गोद लिया था, जिसका नाम शेल्टी था। इसी के चलते इस खास दिन को चुना गया। वैसे तो अमीर घरों के कुत्तों के ठाटबाट के किस्से तो आपने बहुत सुने होंगे, लेकिन आज हम आपको करोड़पति आवारा कुत्तों के बारे में बताने जा रहे हैं। (तस्वीरें-सांकेतिक)

करोड़ों की जमीन के मालिक

करोड़ों की जमीन के मालिक

गुजरात के बनासकांठा जिले में पालनपुर नाम का एक गांव है। इस गांव में तो बहुत से लोग अमीर हैं, लेकिन उनसे ज्यादा चर्चा वहां के आवार कुत्तों की होती है, जो सच में करोड़पति हैं। उनके नाम करोड़ों की जमीन है, उससे जो पैसे आते हैं वो इन आवारा कुत्तों की सेवा में खर्च होते हैं। साथ ही गांव वाले भी उनकी देखरेख के लिए काफी चीजें करते रहते हैं।

नवाबों से मिली थी जमीन

नवाबों से मिली थी जमीन

न्यूज 18 गुजरात की रिपोर्ट के मुताबिक जब यहां पर नवाबों का शासन था, तो उन्होंने 20 बीघा जमीन गांव वालों को पगड़ी के तौर पर दे दी। गांव के ज्यादातर लोग संपन्न थे और उनको जानवरों से बहुत प्यार था। ऐसे में सभी ने मिलकर ऐसा फैसला लिया, जिसने आवारा कुत्तों की किस्मत बदल दी। गांव वालों के मुताबिक उस दौरान सभी के घर आराम से चल जाते थे, लेकिन आवारा कुत्तों को खाने की बहुत दिक्कत होती थी। ऐसे में उन्होंने वो 20 बीघा जमीन उनके नाम कर दी।

जमीन का आता है किराया

जमीन का आता है किराया

इस 20 बीघा जमीन की कीमत आज की तारीख में 5 करोड़ से ज्यादा है। हर साल इस खेत को गांव के लोगों को खेती के लिए दिया जाता है। इसके बदले उनसे किराया लिया जाता है। उससे जो पैसे इकट्ठा होते हैं, उनसे गांव के कुत्तों की देखरेख की जाती है। ये जमीन कुशकल गांव में रोड टच पर स्थित है, जिसे अब कूतरिया के नाम से जाना जाता है।

त्योहार पर स्पेशल व्यवस्था

त्योहार पर स्पेशल व्यवस्था

स्थानीय लोगों के मुताबिक उनके बुजुर्गों को जानवरों से बहुत प्यार था। वो उसी परंपरा को आगे बढ़ा रहे हैं। कुत्ते ही उस खेत के मालिक हैं। ऐसे में उनको अब खाने के लिए नहीं भटकना पड़ता। गांव वाले भी उनको सुबह-शाम खाना देते रहते हैं। जब भी कोई खास त्योहार आता है, तो कुत्तों के लिए भी स्पेशल खाने की व्यवस्था की जाती है।

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