Kajal Dey: दोनों हाथ नहीं फिर भी बच्चों को देते हैं टेबल टेनिस की कोचिंग, मिला बेस्ट कोच का अवॉर्ड
अगरतला, 04 दिसंबर: त्रिपुरा के टेबल टेनिस ट्रेनिंग देने वाले काजल डे ने साबित कर दिया कि 'कोशिश करने वालों की कभी हार नहीं होती'। काजल डे उन लोगों के लिए एक हिम्मत है, जो दिव्यांग होने के बाद अपने सपनों को पूरा नहीं कर पाते। त्रिपुरा की राजधानी अगरतला के रहने वाले काजल डे के दोनों हाथ नहीं हैं, लेकिन इसके बावजूद भी वो टेबल टेनिस की ट्रेनिंग देते हैं। अब साल 2021 में त्रिपुरा सरकार ने उनको बेस्ट कोच के अवार्ड से सम्मानित किया है। हालांकि हिम्मत और कामयाबी की मिसाल बने काजल डे जन्म से दिव्यांग नहीं थे। उनके साथ एक ऐसी घटना घटी, जिसमें उन्होंने अपने हाथ गंवा दिए। क्या है काजल डे की कहानी जानिए...

22-23 साल से बच्चों को दे रहे कोचिंग
पूरे त्रिपुरा की शान काजल डे के चाहे दोनों हाथ नहीं हो, लेकिन उनके हौसलों में बहुत दम हैं। वो खिलाड़ियों को टेबल टेनिस की ट्रेनिंग देते हैं। न्यूज एजेंसी एएनआई को काजल डे ने बताया, 'मैं अगरतला के पोलस्टार क्लब में पिछले 22-23 साल से बच्चों को कोचिंग करा रहा हूं। मुझे जो कुछ मिला है वो बच्चों से ही मिला, वो चैंपियन बने हैं।'

बेस्ट कोच के अवॉर्ड से किया सम्मानित
वहीं सरकार की तरफ से सम्मानित होने पर टेबल टेनिस कोच काजल डे ने कहा कि '2021 में त्रिपुरा सरकार ने बेस्ट कोच के लिए मुझे अवार्ड दिया। मैं सब कुछ मुफ्त कराता हूं। मैं शुरू में जानता था कि मेरे लिए ये मुश्किल है, लेकिन मैंने ठान लिया कि मैं नामुमकिन को मुमकिन करके दिखाऊंगा, आज मैं सफल हूं। कोशिश से सब कुछ मिलता है।'

बम बनाने के दौरान हुआ था हादसा
आपको बता दें कि एक हादसे में काजल डे अपना दोनों हाथ गंवा बैठे थे। कई मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक काजल के पापा सरकारी नौकरी में थे, लेकिन अचानक वो चले बसे। पिता के निधन के बाद उनकी बिजली विभाग में नौकली लग गई, लेकिन वहां उनका मन नहीं लगता था। इसी वक्त वो किसी राजनीतिक पार्टी से जुड़ गए। जहां एक दिन जब वो बम बनाने का ट्रेनिंग ले रहे थे, तभी वो फट गया और उवके हाथ से चीथड़े उड़ गए। उनका चार महीने अस्पताल में इलाज चला, जिसका उनको जिंदगी भर अफसोस है।












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