श्रीमद्भागवद गीता पर बयान देकर फंसी सुषमा स्वराज
नई दिल्ली। धार्मिक ग्रंथ गीता को लेकर केंद्रीय मंत्री सुषमा स्वराज के बयान पर राजनीति गर्मा गयी है। कई विपक्षी दलों ने सुषमा के बयान पर विरोध दर्ज कराया है। कांग्रेस सहित एनसीपी, सीपीएम, बसपा सपा सहित सभी पार्टियों ने सुषमा के बयान पर कड़ी आपत्ति दर्ज की है।

आपको बता दें कि रविवार को गीता को लिखे जाने के 5151 साल होने के अवसर पर आयोजित एक कार्यक्रम में सुषमा स्वराज ने श्रीमद्भागवत गीता को राष्ट्रीय ग्रंथ घोषित करने की बात कही थी। सुषमा ने कहा था कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा को गीता भेंटकर इसकी शुरुआत कर चुके हैं। उन्होंने कहा कि अब इसकी सिर्फ औपचारिक घोषणा ही बाकी है।
सुषमा के इस बयान पर कांग्रेस के नेता मनीष तिवारी ने कहा कि गीता करोड़ों भारतीयों के दिल के करीब है। श्रीमद्भागवत गीता उनका धार्मिक ग्रंथ है और इसे किसी के प्रमाण की जरूरत नहीं है।वहीं सीपीएम नेता सीताराम येचुरी ने कहा कि देश का एकमात्र धार्मिक ग्रंथ भारत का संविधान है। वहीं केंद्रीय मंत्री मुख्तार अब्बास नकवी ने सुषमा स्वराज के बयान का बचाव करते हुए कहा कि उन्होंने कुछ भी गलत नहीं कहा है।
उधर टीएमसी ने सुषमा के बयान पर तीखा हमला करते हुए कहा कि भारत एक धर्मनिरपेक्ष देश है और भारत का धार्मिक ग्रंथ उसका संविधान है। टीएमसी के नेता डेरेक ओ ब्रायन ने कहा कि पुराण हो, कुरान हो, वेद हो, बाइबल हो, गुरू ग्रंथ साहब हो या फिर ज़ेंदा अवस्था, सभी पर हमें गर्व है। हमारा संविधान कहता है कि भारत एक धर्मनिरपेक्ष राज्य है, एक धर्मनिरपेक्ष देश के लिए संविधान ही राष्ट्रीय ग्रंथ है।












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