श्रीमंदिर परिक्रमा प्रकल्प का भव्य उद्धाटन, श्रद्धालुओं के लिए खुला
श्रीमंदिर परिक्रमा परियोजना को आज भक्तों को समर्पित कर दिया गया है। यहां गजपति महाराजा दिब्यसिंघा देब ने तीन दिवसीय महायज्ञ का समापन किया, उन्होंने इसमे अपनी पूर्णाहुति दी और मुख्यमंत्री नवीन पटनायटक ने श्रीमंदिर परिक्रमा को भक्तों को समर्पित कर दिया। इस परिक्रमा की शुरुआत से पहले वैदिक मंत्रोच्चार हुए और हवन किया गया। यहां बारिश के बावजूद भी श्रद्धालु बड़ी संख्या में पहुंचे।
देशभर से श्रद्धालु यहां पहुंचे और उन्होंने 12वीं सदी के मंदिर में पूजा अर्चना की। इसके बाद इन लोगों ने भव्य परिक्रमा का अनुभव लिया। श्री जगन्नाथ मंदिर के इस भव्य निर्माण को देखने के लिए तकरीबन एक लागों ने यहां का दौरा किया। उत्तराखंड के बद्रीनाथ से पुरी आए 12 श्रद्धालुओं ने मंदिर की परिक्रमा की। उन्होंने बताया कि यह ऐतिहासिक दिन है और हम इस दिन इस तीर्थ नगरी पहुंचे हैं, यह हमारे लिए सौभाग्य की बात है।

हम 4 जनवरी से ओडिशा में हैं, हम पुरी पहुंचे तो काफी थक चुके थे लेकिन मंदिर के आसपास के दृश्य को देखकर हम दंग रह गए। यह हमारी यात्रा का सबसे सुंदर हिस्सा रहा है क्योंकि हम उस दिन यहां पहुंचे जब भव्य परिक्रमा का उद्घाटन किया जा रहा था।
इस कार्यक्रम के दौरान ओडिशा के श्रद्धालुओं के चेहरे पर उत्साह साफ देखने को मिल रहा था। यह एक विशाल गलियारा है। एक भक्त ने बताया कि हम पिछले एक दशक से यहां हर महीने आ रहे हैं। मंदिर को हमेशा हमने अतिक्रमण से भरा हुआ देखा, यहां आस-पास घूमने की जगह नहीं थी, लेकिन अब यहां काफी खूबसूरत गलियारा तैयार किया गया है। यह बदलाव काफी अच्छा है, जो इस मंदिर को और भी घूबसूरत बनाता है।
जगन्नाथ संस्कृति एक्सपर्ट नारायण रथ शर्मा ने कहा कि इस हेरिटेज कोरिडोर की लंबे समय से जरूरत थी। श्रीमंदिर में खासकर कार्तिक के हिंदू माह के दौरान मेघनाद पचेरी की चारों दिशाओं में परिक्रमा करने की परंपरा है। ऐसी मान्यता है कि मंदिर के चारों ओर तीन बार परिक्रमा करने से मोक्ष की प्राप्ति हो सकती है, यही वजह है कि इसे नित्य बैकुंठ भी कहा जाता है।












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