'धरना' वाले आदेश पर लोकसभा स्पीकर की सफाई, कहा- 2009 से चल रही प्रक्रिया, बिना तथ्य ना लगाएं आरोप
नई दिल्ली, 15 जुलाई: संसद का मानसून सत्र 18 जुलाई से शुरू होने वाला है। जिसको लेकर संसदीय सचिवालय तैयारियों में जुटा हुआ है। इसके साथ ही सत्र शुरू होने से पहले तमाम तरह के निर्देश जारी किए जा रहे, जिसमें से एक पर विवाद खड़ा हो गया। इस निर्देश में संसद परिसर में धरना, प्रदर्शन, उपवास आदि ना करने की बात कही गई। जिसको विपक्ष ने मुद्दा बना लिया। इस पर अब खुद लोकसभा अध्यक्ष ओम बिड़ला ने सफाई दी है।

स्पीकर ने कहा कि हर बार सत्र शुरू होने से पहले लोकसभा सचिवालय तमाम तरह के निर्देश जारी करता है। जिसमें संसद परिसर में धरना, उपवास या किसी धार्मिक समारोह को लेकर दिशानिर्देश दिए जाते हैं। ये एक नियमित प्रक्रिया है, जिसका पालन हर बार किया जाता है। स्पीकर ने कहा कि इस बार कोई खास सर्कुलर जारी नहीं हुआ है, लेकिन ये एक प्रक्रिया है, जो 2009 या उससे पहले से चली आ रही है। मैं राजनीतिक दलों से आग्रह करता हूं कि वो तथ्यों के इस तरह के आरोप ना लगाएं।
राज्यसभा महासचिव ने लिखा थी ये बात
राज्यसभा महासचिव पीसी मोदी के आदेश में कहा गया कि संसद के सदस्य किसी भी प्रदर्शन, धरना, हड़ताल, उपवास, या किसी धार्मिक समारोह को करने के उद्देश्य से संसद भवन के परिसर का उपयोग नहीं कर सकते हैं। अपने आदेश के आखिर में उन्होंने सभी सदस्यों का सहयोग मांगा है।
कांग्रेस को मिला नया मुद्दा
कांग्रेस नेताओं ने तुरंत इस आदेश की कॉफी शेयर करते हुए मोदी सरकार को घेरना शुरू कर दिया। मामले में कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने ट्वीट कर लिखा कि "विश्वगुरु का नवीनतम साल्वो, D(h)arna मना है!''












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