'हर बार घड़ी देखनी पड़ती थी', Sonam Wangchuk अस्पताल में हुए भर्ती, पत्नी ने लिखी भावुक पोस्ट
Sonam Wangchuk Admitted to Hospital: लद्दाख के प्रसिद्ध जलवायु कार्यकर्ता सोनम वांगचुक की तबीयत बिगड़ने के बाद अस्पताल में भर्ती करवाया गया है। रविवार को उनकी पत्नी गीताांजली जे. आंगमो ने बताया है कि उनकी सेहत को ध्यान में रखते हुए उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया जा रहा है।
गीताांजली ने सोशल मीडिया पर भावुक पोस्ट शेयर करते हुए कहा कि लंबे समय बाद उन्हें सोनम वांगचुक से बिना किसी जल्दबाजी के खुलकर बात करने का मौका मिला।

बार-बार घड़ी देखनी पड़ती थी...पत्नी ने लिखी इमोशनल पोस्ट
"काफी समय बाद आज सोनम वांगचुक से बिना घड़ी की ओर डर-डर कर देखे खुलकर बात करने का मौका मिला। जेल में मिलने के दौरान हर बार सिर्फ 60 मिनट ही मिलते थे, इसलिए उस कम समय का पूरा इस्तेमाल करने के लिए बार-बार घड़ी देखनी पड़ती थी। परिवार के डॉक्टर की मजबूत सलाह पर अब उन्हें हेल्थ चेकअप के लिए ले जाया जा रहा है। उन्हें एक अच्छे अस्पताल में 36 घंटे तक डॉक्टरों की निगरानी में रखा जाएगा।"
पत्नी ने बताया परिवार के डॉक्टर की मजबूत सलाह के बाद सोनम वांगचुक को स्वास्थ्य जांच के लिए अस्पताल में भर्ती करवाया गया है। गीताांजली आंगमो ने उम्मीद जताई कि इस दौरान उनकी पूरी तरह से स्वास्थ्य जांच होगी और डॉक्टर उनकी स्थिति पर नजर रखेंगे।
क्यों जेल में बंद किए गए थे सोनम वांगचुक?
लद्दाख के जलवायु कार्यकर्ता Sonam Wangchuk को सितंबर 2025 में गिरफ्तार किया गया था। उन्हें राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (NSA) के तहत हिरासत में लिया गया। जब वो लद्दाख को राज्य का दर्जा और संविधान की छठी अनुसूची (Sixth Schedule) देने की मांग के लिए आंदोलन और भूख हड़ताल कर रहे थे। सरकार का आरोप था कि उनके भाषणों और बयानों से लेह में विरोध प्रदर्शन उग्र हो गए, जिनमें कई लोग घायल हुए और कुछ की मौत भी हुई।
प्रशासन ने कहा कि शांति और सार्वजनिक व्यवस्था बनाए रखने के लिए उन्हें NSA के तहत हिरासत में लेना जरूरी था सोनम वांगचुक की संस्था SECMOL का FCRA लाइसेंस रद्द किया गया और विदेशी फंडिंग से जुड़े नियमों के उल्लंघन की जांच की गई।
14 मार्च को जेल से कैसे रिहा हुए सोनम वांगचुक?
वहीं सोनम वांगचुक को 14 मार्च 2026 को जोधपुर केंद्रीय कारागार से रिहा कर दिया गया। गृह मंत्रालय ने उनके 170 दिनों के राष्ट्रीय सुरक्षा अधिनियम (रासुका) के तहत हिरासत के आदेश को "तत्काल प्रभाव से" निरस्त कर दिया था।
केंद्रीय गृह मंत्रालय ने इस सख्त अधिनियम की धारा 14 के तहत अपनी शक्तियों का प्रयोग करते हुए लेह जिला मजिस्ट्रेट के उस आदेश को रद्द किया, जिसके तहत वांगचुक को 26 सितंबर 2025 से हिरासत में रखा गया था। मंत्रालय ने बताया कि वे रासुका के तहत हिरासत की आधी अवधि पहले ही पूरी कर चुके थे।
यार रहे गृह मंत्रालय द्वारा पिछले समय में किसी भी बंदी के लिए इस प्रावधान का प्रयोग किए जाने की जानकारी नहीं है। 1980 के इस अधिनियम के तहत किसी व्यक्ति को कार्यकारी आदेश पर एक साल तक बिना अदालती मुकदमे के हिरासत में रखा जा सकता है, यदि उसे राष्ट्रीय सुरक्षा या सार्वजनिक व्यवस्था के लिए खतरा माना जाता है।
वांगचुक की रिहाई अगले सप्ताह होने वाली सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई से ठीक पहले हुई है, जिसमें उनकी पत्नी गीतांजलि जे. आंगमो ने रासुका के आदेश को चुनौती देने वाली याचिका दायर की है। साथ ही, यह लेह और कारगिल में नागरिक समाज समूहों द्वारा केंद्र शासित प्रदेश के लिए संवैधानिक सुरक्षा उपायों की मांग को लेकर 16 मार्च को बुलाए गए विरोध प्रदर्शन से दो दिन पहले आई है।












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