कोरोना की हर्ड इम्युनिटी के करीब है दिल्ली? जानिए क्या कहते हैं विशेषज्ञ
नई दिल्ली: कोरोना वायरस पूरे देश में फैल चुका है। देश की राजधानी भी इससे बुरी तरह प्रभावित है, जहां मई-जून में हालात बहुत खराब हो गए थे और रोजाना 3000 से ज्यादा मामले सामने आने लगे। फिर केंद्र और राज्य सरकार ने वहां पर मिलकर तेजी से कदम उठाए, जिस वजह से अब रोजाना का आंकड़ा 1000 के आसपास ही रहता है, लेकिन एक सवाल अभी भी बरकरार है कि क्या दिल्ली हर्ड इम्युनिटी की ओर बढ़ रही है। इस मुद्दे पर विशेषज्ञों में अभी मतभेद है।
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29 प्रतिशत आबादी चपेट में
दरअसल हर्ड इम्युनिटी को महामारी का एक चरण माना जा सकता है, इस चरण में वायरस व्यापक रूप से फैल नहीं सकता, क्योंकि वहां पर्याप्त कमजोर लोग नहीं होते हैं। इकोनॉमिक्स टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक कुछ वैज्ञानिकों का कहना है कि हम हर्ड इम्यूनिटी के करीब हैं, क्योंकि 29 प्रतिशत आबादी वायरस के संपर्क में है, जबकि बाकी वैज्ञानिकों का कहना है कि जब तक 70 प्रतिशत आबादी की स्थिति का पता नहीं लग जाता, तब तक हर्ड इम्युनिटी को लेकर कुछ भी कहना मुश्किल है।

पिक-अप दर बहुत कम
दिल्ली में पहला सीरोलॉजिकल सर्वे, जो 27 जून से 10 जुलाई के बीच किया गया था, उसमें पता चला कि 22.8% लोगों में कोविड-19 की एंटीबॉडी थी। इसके बाद अगस्त में फिर से ये सर्व हुआ तो इस आंकड़े में 6 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई। इंस्टीट्यूट ऑफ लिवर ऐंड बायिलरी साइंसेज के निदेशक डॉ. एस. के. सरीन के मुताबिक अभी हर्ड इम्युनिटी तक पहुंचने में दिल्ली को कुछ महीने लग सकते हैं। सर्वे के परिणाम बताते हैं कि संक्रमण की पिक-अप दर बहुत कम है और इससे चुपचाप प्रभावित होने वाले लोग अधिक हैं। ऐसे में हमें परीक्षण बढ़ाने की जरूरत है।

इन बड़े शहरों में भी सर्वे
कोरोना की सही स्थिति के आंकलन के लिए मुंबई, पुणे और अहमदाबाद जैसे शहरों में भी सीरो सर्वे किया गया। मुंबई के तीन वार्डों में जुलाई में किए गए सर्वे से पता चला कि झुग्गी-झोपड़ियों में रहने वाले 57% लोगों और गैर-मलिन बस्तियों में रहने वाले 16% लोगों में कोविड-19 एंटीबॉडी मौजूद है। इसमें 6936 लोगों के सैंपल लिए गए थे, जिसे विशेषज्ञ बहुत कम बता रहे हैं। वहीं पुणे में हाई रिस्क जोन में 1,664 लोगों पर टेस्ट किया गया, जिसमें पता चला कि आधे से अधिक लोगों में कोरोनो वायरस के खिलाफ एंटीबॉडी थी।

राज्यों की तुलना मुश्किल
पंजाब सरकार ने भी सीरो सर्वे करवाया जिसमें 1250 लोगों के सैंपल लिए गए। इसमें पता चला कि 28 प्रतिशत आबादी में कोविड एंटीबॉडी मौजूद थी। वहीं अहमदाबाद में ये आंकड़ा 17.6% था। सफदरजंग अस्पताल के डॉ. जुगल किशोर के मुताबिक विभिन्न शहरों या राज्यों में किए गए सीरो सर्वे की तुलना करना मुश्किल है। इसका प्रमुख कारण ये है कि सैंपल की संख्या और समय समान नहीं है। उन्होंने कहा कि आप उदाहरण के लिए पुणे को ले लीजिए जहां इतने कम सैंपल की जांच हुई। साथ ही ये हाई रिस्क जोन में थे, जबकि दिल्ली में सैंपल की संख्या ज्यादा है, ऐसे में तुलना मुश्किल है। लोक नायक अस्पताल के निदेशक डॉ. सुरेश कुमार के मुताबिक अभी तक कोरोना से ठीक हुए मरीज के दोबारा संक्रमित होने के मामले नहीं सामने आए हैं। ऐसे में माना जा सकता है कि दिल्ली के एक तिहाई आबादी सुरक्षित है।












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