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सोशल: 'भक्तों को अमरनाथ में जयकारा लगाने से रोका तो प्रलय आएगा'

अमरनाथ यात्रा
Getty Images
अमरनाथ यात्रा

नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल ने 'पवित्र अमरनाथ गुफा' को 'साइलेंस ज़ोन' घोषित करते हुए वहां एक निश्चित जगह से आगे पूजा-पाठ करने पर रोक लगा दी है.

'साइलेंस ज़ोन' घोषित किए जाने का ये मतलब है कि अमरनाथ दर्शन के लिए जाने वाले श्रद्धालु अब वहां जयकारे और मंत्रोच्चार नहीं कर पाएंगे.

जस्टिस स्वतंत्र कुमार की अध्यक्षता वाली एनजीटी बेंच ने अमरनाथ श्राइन बोर्ड को क्षेत्र के पर्यावरण की देखभाल के साथ-साथ श्रद्धालुओं के लिए ज़रूरी इंतज़ाम करने का भी निर्देश भी दिया है ताकि लोग स्पष्ट दर्शन से वंचित न हो.

अमरनाथ गुफा (फ़ाइल फोटो)
SAJJAD HUSSAIN/AFP/Getty Images
अमरनाथ गुफा (फ़ाइल फोटो)

इससे पहले एनजीटी ने कहा था कि 'साइलेंस ज़ोन' घोषित करने से अमरनाथ गुफा को हिमस्खलन से बचाया जा सकेगा और इसके मौलिक स्वरूप का भी संरक्षण होगा.

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एनजीटी के इस आदेश पर बहस छिड़ गई है. सोशल मीडिया पर भी कई लोग प्रतिक्रियाएं दे रहे हैं.

कुछ लोग जहां एनजीटी के इस फैसले का विरोध कर रहे हैं तो कुछ इसे सही बता रहे हैं.

आध्यात्मिक गुरू श्री श्री रविशंकर ने ट्वीटर पर लिखा, "मंदिर मे कोई भी पूजा घंटा बजाने और मंत्रोच्चारण के बिना शुरू नहीं हो सकती."

वहीं ट्वीटर हैंडल @Azh89style से ट्वीट किया गया, "अमरनाथ यात्रियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने का एनजीटी का ये फैसला बहुत ही अच्छा है. उस इलाके में हर समय हिमस्खलन का खतरा बना रहता है, ऐसे में ये एक अच्छा कदम है."

एक अन्य ट्वीटर यूज़र आंचल सक्सेना लिखती हैं, "मैं कोर्ट के फैसले का सम्मान करती हूं, लेकिन हम सभी को इसपर सवाल उठाना चाहिए. हर यात्री को तीर्थयात्रा के दौरान मंत्रोच्चारण करना चाहिए."

इससे उलट, हर्ष पांचाल लिखते है, "एनजीटी का ये आदेश पर्यायवरण को बचाने के लिए है."

राष्ट्रीय हरित प्राधिकरण के इस फैसले को लेकर कई लोगों में गुस्सा भी देखा जा रहा है.

डॉक्टर विजय शर्मा लिखते हैं, "भोलेबाबा के भक्तों को जयकारा लगाने से अमरनाथ में रोका तो प्रलय आ जाएगा."

रजत अभिनय सिंह ने व्यंग्य करते हुए ट्वीटर पर लिखा, "चलिए भला, मेरे बोलने से प्रदूषण नहीं हो रहा."

ऐसे ही एक और ट्वीटर यूजर वरुण उपाध्याय लिखते हैं, "भविष्य में एनजीटी क्रिकेटरों को स्टेडियम में बिना बैट-बल्ले के आने का आदेश जारी करेगा."

वहीं विवेक अग्रवाल इस फैसले पर सवाल उठाते हुए कहते हैं, "वैज्ञानिक रूप से मजबूत देश जापान में जाकर देखिए. वहां के पहाड़ी मंदिरों में हज़ार गुना ज्यादा बड़ी घंटियां हैं."

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