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सोशल: क्या राजीव गांधी जैसी हिम्मत दिखाएंगे पीएम मोदी?

By Bbc Hindi
मोदी और राजीव गांधी
AFP
मोदी और राजीव गांधी

मालदीव में राजनीतिक संकट चल रहा है. इस संकट से उबरने के लिए मालदीव के पूर्व राष्ट्रपति मोहम्मद नशीद ने अमरीका और भारत से गुहार लगाई है.

मालदीव में संकट की शुरुआत तब हुई, जब राष्ट्रपति अब्दुल्ला यमीन ने सुप्रीम कोर्ट के राजनीतिक क़ैदियों को रिहा करने के आदेश को मानने से इनकार कर दिया. राष्ट्रपति ने 15 दिनों के भीतर आपातकाल लगाने के साथ चीफ़ जस्टिस को भी हिरासत में लेने के आदेश दिए.

मोहम्मद नशीद की भारत से गुहार लगाने के बाद लोगों के ज़ेहन में जो ख़्याल सबसे पहले आते हैं, वो हैं ऑपरेशन कैक्टस और राजीव गांधी.

30 साल पहले विद्रोह के बाद भारत के तत्कालीन प्रधानमंत्री राजीव गांधी ने मालदीव में भारतीय सेना भेजी थी. इस ऑपरेशन को कैक्टस नाम दिया गया था.

भारतीय सेना का ये ऑपरेशन सफल रहा था. राजीव गांधी के इस क़दम की चर्चा दुनियाभर में रही.

पूर्व राष्ट्रपति मोहम्मद नशीद ने वर्तमान राजनीतिक संकट में हस्तक्षेप के लिए भारत, अमरीका से कहा
Getty Images
पूर्व राष्ट्रपति मोहम्मद नशीद ने वर्तमान राजनीतिक संकट में हस्तक्षेप के लिए भारत, अमरीका से कहा

राजीव गांधी बनाम नरेंद्र मोदी

अब जब लगभग 30 साल बाद मालदीव में हालात फिर बेहतर नहीं हैं, तब मालदीव समेत दुनिया के कई देशों की निगाहें भारत की तरफ़ हैं.

मालदीव संकट के मद्देनज़र सोशल मीडिया पर लोग राजीव गांधी की तुलना प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से कर रहे हैं.

कांग्रेस नेता मनीष तिवारी ने ट्वीट किया, ''1988 में प्रधानमंत्री राजीव गांधी ने राष्ट्रपति गयूम की सरकार बचाने के लिए मालदीव में सेना भेजी थी. क्या 2018 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी में ये राजनीतिक-राजनयिक समझ है कि वो इस आइलैंड में लोकतंत्र की रक्षा कर सकें?''

https://twitter.com/ManishTewari/status/961441075075235841

वरिष्ठ टीवी पत्रकार राजदीप सरदेसाई ने लिखा, ''इस बात में कोई शक नहीं है कि राजीव गांधी ने ग़लतियां कीं, लेकिन प्रधानमंत्री रहते हुए ऑपरेशन कैक्टस उनकी बेहतरीन विदेश नीति थी.''

पवन खेड़ा ने ट्वीट किया, ''राजीव गांधी ने राष्ट्रपति गयूम की गुहार के 8-9 घंटों के भीतर ही 1600 सैनिकों को मालदीव भेज दिया था. रोनल्ड रीगन से लेकर मार्गेट थेचर तक ऑपरेशन कैक्टस के लिए राजीव गांधी को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रशंसा मिली थी.''

नरेंद्र लिखते हैं, ''मोदी में ये राजनीतिक कुशाग्रता है ही नहीं कि वो किसी दूसरे मुल्क के मामलों में दखल दे पाएं. ठीक वैसे ही जैसे राजीव गांधी ने मालदीव और श्रीलंका में किया था.''

आरके यादव लिखते हैं, ''मालदीव के मुद्दे से मेरा दिल जल रहा है. भारत सरकार को मालदीव में दखल देकर गयूम को हटाना चाहिए. इसके अलावा सुप्रीम कोर्ट के आदेश के मद्देनज़र सत्ता से बाहर किए गए नशीद की मदद करनी चाहिए. ये 1988 में राजीव गांधी के साहसी क़दम ऑपरेशन कैक्टस की तरह ही होगा. मोदी को एंटी-चीन नशीद को सत्ता दिलाने में ऑपरेशन कैक्टस दोहराने की ज़रूरत है.''

https://twitter.com/rawrkyadav/status/960555478332960768

मनजीत बग्गा लिखते हैं, ''राजीव गांधी ने श्रीलंका में भी एलटीटीई को लेकर दख़ल दिया था. नतीजा क्या निकला?''

ट्विटर हैंडल @HAPPY_ARMY_MAN से लिखा गया, ''ये ठीक नहीं रहेगा कि हम मालदीव में सेना भेजें. इन दिनों हम कश्मीर, सैनिकों और अपने भाइयों के संघर्ष के लिए कुछ नहीं कर पा रहे हैं. सब तरफ़ लाचारी है. एक लाचार मुल्क दूसरे लाचार मुल्क की मदद नहीं कर सकता.''

मालदीव
Getty Images
मालदीव

जानकारों का क्या कहना है?

इंस्टिट्युट फ़ॉर डिफ़ेंस स्टडीज़ एंड एनालिसिस के प्रोफ़ेसर एसडी मुनि कहते हैं, "नशीद अमरीका और ब्रिटेन को अपने कुछ द्वीप देना चाहते थे ताकि यहां नेवल फैसिलिटी बनाने में उन्हें आसानी हो. मुझे लगता है कि भारत सरकार भी इससे नाराज़ थी. यही वजह है कि जब नशीद को हटाया गया तो मनमोहन सरकार ने 24 घंटों के अंदर उसका समर्थन किया जल्दबाज़ी में और बिना परिणाम की चिंता किए. इसीलिए अब भारत को नीति बदलकर वापस नशीद का समर्थन करना पड़ रहा है."

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English summary
Social PM Modi will show courage like Rajiv Gandhi

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