माया, बॉबी और रूबी...वो 3 कुत्ते, जिन्होंने काबुल में बचाई भारतीयों की जान, अब लौटे वतन

माया, बॉबी और रूबी ने काबुल में आतंकी हमलों से भारतीयों को कैसे बचाया? जानिए

नई दिल्ली, 31 अगस्त: अमेरिका ने अफगानिस्तान में अपने 20 साल के सैनिक मिशन की समाप्ति का ऐलान करते हुए अपने सभी सैनिकों को वापस बुला लिया है। अमेरिकी सैनिकों की अफगानिस्तान से वापसी की बाद जहां राष्ट्रपति बाइडेन के फैसले पर अमेरिका में सवाल उठ रहे हैं, वहीं तालिबान के आतंकियों ने काबुल में आतिशबाजी और फायरिंग कर आजादी का जश्न मनाया है। हालांकि अफगानिस्तान के स्थानीय लोगों में अभी भी डर और दहशत का माहौल है। इस बीच माया, बॉबी और रूबी की भी काबुल से अपने वतन भारत वापसी हो गई है। दरअसल ये तीनों वो स्निफर डॉग हैं, जो सुरक्षाकर्मियों के साथ काबुल में भारतीय दूतावास की सिक्योरिटी में तैनात थे।

काबुल से एयरलिफ्ट किए गए तीनों स्निफर डॉग

काबुल से एयरलिफ्ट किए गए तीनों स्निफर डॉग

राजधानी काबुल पर तालिबान के कब्जे के बाद अफगानिस्तान में बिगड़े हालात के बीच माया, बॉबी और रूबी को एयरलिफ्ट कर दिल्ली वापस बुला लिया गया है। इन तीनों स्निफर डॉग्स को पहले गुजरात के जामनगर में भारतीय वायुसेना के स्टेशन पर उतारा गया और इसके बाद दिल्ली में भारत-तिब्बत सीमा पुलिस के छावला कैंप पहुंचाया जाया गया, जहां तीनों को नई जिम्मेदारी मिलेगी।

तीन साल तक कमांडोज की तरह की हिफाजत

तीन साल तक कमांडोज की तरह की हिफाजत

माया, बॉबी और रूबी तीनों आईटीबीपी में ट्रेंड हुए स्निफर डॉग हैं, जो अफगानिस्तान में आतंकी खतरे के बीच पूरे तीन साल तक कमांडोज की तरह हिम्मत, बहादुरी और वफादारी के साथ काबुल में भारतीय दूतावास की सुरक्षा करते रहे। सोमवार को प्रमुख सीमा गश्ती संगठन (सीबीपी) ने एक वीडियो भी जारी किया, जिसमें दिखाया गया था कि अफगानिस्तान के मुश्किल हालात में इन तीनों स्निफर डॉग्स ने खुद को कैसे फिट रखा। इस वीडियो में रूबी एक ट्रेड मिल पर एक्सरसाइज करते हुए दिखाई दे रही थी।

नई जिम्मेदारी के लिए तैयार रूबी

नई जिम्मेदारी के लिए तैयार रूबी

एक शीर्ष अधिकारी ने बताया, 'रूबी बहुत ही ज्यादा एनर्जेटिक है। काबुल में भारतीय दूतावास पर बखूबी अपने काम को अंजाम देने के बाद अब रूबी अपने हैंडलर हेड कांस्टेबल कृष्णकांत के साथ नई जिम्मेदारी के लिए तैयार है। उसने काबुल में भारतीय लोगों और अपने देश की संपत्ति की सुरक्षा के लिए बेहतरीन काम किया है। विस्फोटकों से लदे वाहनों की जरिए हमलों को अंजाम आतंकियों की एक पुरानी और आम साजिश है, जिसे कई बार नाकाम कर ITBP की कैनाइन विंग ने काबुल में भारतीय दूतावास को सुरक्षित रखा।

काबुल में क्या थी इनकी जिम्मेदारी

काबुल में क्या थी इनकी जिम्मेदारी

अधिकारियों के मुताबिक, काबुल में भारतीय दूतावास में आने वाली राशन और सप्लाई की गाड़ियां चेक करने की जिम्मेदारी इन्हीं तीनों स्निफर डॉग्स के ऊपर थी। जिस वक्त भारतीय दूतावास के दफ्तर में निर्माण कार्य चल रहा था, उस वक्त सामान लेकर अंदर आने वाले हर वाहन की चेकिंग एक बड़ी चुनौती थी, क्योंकि किसी भी वाहन में विस्फोटक हो सकता था। लेकिन, इन तीनों खोजी कुत्तों ने कड़ी मेहनत और बहादुरी के साथ ऐसी किसी भी खतरनाक साजिश को पूरा होने से रोका, जिससे दूतावास में भारतीय लोगों को कोई नुकसान पहुंचे।

आईईडी बम खोजकर बचाई लोगों की जान

आईईडी बम खोजकर बचाई लोगों की जान

दूतावास में सुरक्षा ड्यूटी के दौरान हेड कांस्टेबल कृष्णकांत, हेडल कांस्टेबल बिजेंद्र सिंह और कांस्टेबल अतुल कुमार इन तीनों स्निफर डॉग्स के हैंडलर थे। अपनी ड्यूटी के दौरान माया, बॉबी और रूबी ने कई बार आईईडी बम खोजे और ना केवल भारतीय लोगों, बल्कि भारतीय दूतावास में काम करने वाले स्थानीय अफगानी नागरिकों की जान की भी हिफाजत की। फिलहाल अपने वतन लौटकर तीनों स्निफर डॉग खुश हैं और नई जिम्मेदारी के इंतजार में हैं।

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