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मध्य प्रदेश में क्षेत्रीय दल बिगाड़ सकते हैं बीजेपी-कांग्रेस का गणित

By विनोद कुमार शुक्ला
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नई दिल्ली। मध्य प्रदेश विधानसभा चुनाव में मुकाबला मुख्यत: बीजेपी और कांग्रेस के बीच होता दिखाई दे रहा है लेकिन आने वाले दिनों में कुछ स्थानीय राजनीतिक दल इन दोनों दलों की मुश्किलों को बढ़ा सकते हैं। कुछ स्थानीय राजनीतिक दल अपने प्रभाव वाले इलाकों में इन पार्टियों के लिए मुश्किलें पैदा कर सकते हैं। ऐसे में मध्य प्रदेश में विधानसभा चुनाव काफी रोचक होने की संभावना है।

जय आदिवासी युवा शक्ति मैदान में

जय आदिवासी युवा शक्ति मैदान में

मालवा-निमर क्षेत्र में जनजातीय समुदाय के संगठन जय आदिवासी युवा शक्ति के आने से कांग्रेस की चिंता बढ़ गई है और इसलिए कांग्रेस इनके साथ गठबंधन करने की कोशिश कर रही थी लेकिन कोई रास्ता नहीं निकल पाया। इन इलाकों में आदिवासी वोट बैंक को जोड़ने के लिए कांग्रेस कांतिलाल भूरिया को भी आगे करके चल रही है।

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कांग्रेस के लिए आसान नहीं इस इलाके में राह

कांग्रेस के लिए आसान नहीं इस इलाके में राह

मालवा-निमर क्षेत्र बीजेपी का इलाका रहा है लेकिन इस चुनाव में किसान आंदोलन और तीन बार सत्ता में रहने के कारण पार्टी के खिलाफ लोगों की नाराजगी है और यही कारण है कि कांग्रेस इनको साधने की कोशिश में लगी है लेकिन JAYS के आने से मुकाबला यहां कांग्रेस के लिए आसान नहीं दिखाई दे रहा है।

गोंडवाना गणतंत्र पार्टी बीजेपी के लिए परेशानी बन सकती है

गोंडवाना गणतंत्र पार्टी बीजेपी के लिए परेशानी बन सकती है

JAYS राज्य की 80 सीटों पर अपने उम्मीदवार उतार रही है और 33 गैर-जनजातीय उम्मीदवारों को टिकट देकर और अधिक जनसमर्थन जुटाने की कोशिश में है। ये उन सीटों पर ध्यान केंद्रित कर रहे हैं जहां जनजातीय आबादी कम से कम 40 हजार है। गोंडवाना गणतंत्र पार्टी ने 90 सीटों पर उम्मीदवार उतारने का फैसला किया है और खुलकर ऐलान किया है कि पार्टी का मंसूबा बीजेपी को हराना है। ये दल किसी से भी हाथ मिलाने को तैयार है, हालांकि अभी तक कुछ तय नहीं हो पा रहा है।

सपाक्स भी पहुंचाएगा नुकसान-विश्लेषक

सपाक्स भी पहुंचाएगा नुकसान-विश्लेषक

दूसरी तरफ, सपाक्स सरकार की आरक्षण नीति के खिलाफ मैदान में है और SC-ST एक्ट में संशोधन का विरोध करता रहा है। सपाक्स को राजनीतिक दल का दर्जा भी मिला हुआ है और बहुत से विश्लेषकों का मानना है कि ब्राह्मण, राजपूत और पिछड़े वर्ग के बहुतायत वाले इलाकों में ये दल भारी नुकसान करेगा जिसका खामियाजा सबसे अधिक बीजेपी को भुगतना होगा।

वहीं, बसपा का भी उत्तर प्रदेश से सटे मध्य प्रदेश के इलाकों में अच्छा प्रभाव है और दलित वोट बैंक के लिहाज से इसका खामियाजा कांग्रेस को भुगतना पड़ सकता है। सूबे में समाजवादी पार्टी का कोई खास प्रभाव नहीं जान पड़ता है। माना जा रहा है कि 50 सीटों पर बीजेपी और कांग्रेस के बीच नजदीकी मुकाबला हो सकता है जहां हार-जीत का अंतर 1000-2000 तक रहने की संभावना है। इस स्थिति में स्थानीय दलों की भूमिका को कम करके नहीं आंका जा सकता है।

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English summary
Smaller political parties to play important role in a closely contested MP Assembly polls
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