मणिपुर की जनता का कांग्रेस और भाजपा से उठ रहा विश्वास! इसलिए 6 महीने में बन गए तमाम दल
मणिपुर विधानसभा चुनाव में तमाम नए दलों का गठन हुआ। इनके नेताओं का कहना है कि भाजपा और कांग्रेस राज्य के हित में काम नहीं कर रहे। उनका नेतृत्व दिल्ली में बैठता है।
इंफाल। बीते 6 महीनों के भीतर मणिपुर में छोटी पार्टियां उभरी हैं। इसमें इरोम शर्मिला की पीपल्स रीसर्जेन्स ऐंड जस्टिस एलायंस (PRJA) उनमें से एक है। राजनीतिक विश्लेषकों की मानें तो नई पार्टियों का उभार इसलिए भी हो रहा है क्योंकि राज्य के लोगों को यह महसूस हो रहा है कि दो राष्ट्रीय दल कांग्रेस और भारतीय जनता पार्टी उनके मुद्दों को हल करने में अक्षम हैं। जिसमें आर्थिक बंदी और लंबे समय से सशस्त्र बल (विशेष अधिकार) कानून यानी अफस्पा को खत्म करने की बात शामिल है।

PRJA के संयोजक इरेन्ड्रो लेइचोनबाम ने जो थंगमेईबांद सीट से, शर्मिला थोबुल और नजमा बीबी, वाबगई से चुनाव लड़ रही हैं। तीनों की उम्र 45 से कम हैं। लेइचोनबाम , ने कहा कि हम चाहते तो बतौर निर्दल प्रत्याशी चुनाव लड़ सकते थे लेकिन हमारी दीर्घकालिक दृष्टि है। लेइचोनबाम ने कहा कि जबकि कांग्रेस और भाजपा राष्ट्रीय पार्टियां हैं और उनका नेतृत्व दिल्ली में बैठता है, हमारा मानना है कि वो मणिपुर के लोगों और उनके अधिकारों के लिए वास्तव में लड़ाई नहीं लड़ सकते और हम मणिपुर के लिए न्याय चाहते हैं।
लेइचोनबाम का दावा है उनकी पार्टी PRJA को युवाओं, पढ़े लिखे मतदातातओं का सहयोग मिल रहा है। मणिपुर के चुनाव में बेरोजगारी, अफ्सपा, भ्रष्टाचार, कांग्रेस और भाजपा की 'विभाजनकारी राजनीति' PRJA का मुद्दा है।
इतना ही कांग्रेस नेता और प्रदेश के मुख्यमंत्री ओकराम इबोबी सिंह की सरकार में मंत्री रहे बिजोय कोइजम ने भी पार्टी बनाई है। नेशनल डेमोक्रेटिक फ्रंट का पंजीकरण बीते साल अक्टूबर में हुआ और इस चुनाव में 13 प्रत्याशी मैदान में हैं। कोईजम ने कहा कि हमारी मेंबरशिप 1,000 तक पहुंच गई है। मैंने एक अलग राजनीतिक दल बनाने के लिए बहुत सोचा, क्योंकि कांग्रेस और भाजपा मणिपुर के हित में काम नहीं करते। उनका नेतृत्व दिल्ली में बैठता है।
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