मानसून सत्र के दौरान केंद्र को घेरने की तैयारी में किसान संगठन, संसद के बाहर और अंदर ऐसे होगा प्रदर्शन
नई दिल्ली, 04 जुलाई। कोरोना वायरस महामारी की दूसरी लहर का प्रकोप कम होने के बाद एक बार फिर किसान आंदोलन उग्र हो गया है। इस बीच 19 जुलाई से शुरू हो रहे संसद के मानसून सत्र के दौरान किसानों ने अपने आंदोलन को और तेज करने का ऐलान किया है। पीटीआई के मुताबिक संयुक्त किसान मोर्चा (एसकेएम) ने रविवार को घोषणा की कि 200 से अधिक किसानों का एक समूह मानसून सत्र के दौरान हर दिन संसद के सामने भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार के तीन विवादास्पद कृषि कानूनों के खिलाफ विरोध प्रदर्शन करेगा।

गौरतलब है कि बीते 7 महीने से लगातार किसान केंद्र सरकार के तीन कृषि कानूनों के विरोध में दिल्ली के बॉर्डर वाले इलाकों में जमे हुए हैं। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक दिल्ली के सिंघु बॉर्डर पर संयुक्त किसान मोर्चा की बैठक के बाद किसान नेता बलबीर सिंह राजेवाल ने बताया कि सत्र की शुरुआत से दो दिन पहले यानी 17 जुलाई को सभी विपक्षी संसद सदस्यों को 'चेतावनी पत्र' लिखा जाएगा, उनसे मांग की जाएगी कि संसद में कृषि कानूनों के खिलाफ आवाज उठाएं और सरकार को जवाब देने को मजबूर करें।
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किसान नेता गुरनाम सिंह चारुनी ने कहा, 'हम 17 जुलाई को 'चेतावनी पत्र' में विपक्षी सांसदों से भी सदन के अंदर हर दिन इस मुद्दे को उठाने के लिए कहेंगे, जबकि हम विरोध में बाहर बैठेंगे। हम उनसे कहेंगे कि सदन से वॉकआउट करके केंद्र को बचने का मौका ना दें बल्कि सत्र को तब तक चलने ना दें जब तक कि केंद्र सरकार कृषि मुद्दों पर कोई जवाब ना दे।' किसान नेता ने कहा कि हम संसद के बाहर विरोध प्रदर्शन जारी रखेंगे, जब तक कि वे हमारी मांगें नहीं सुन लेते। प्रदर्शन करने के लिए शांतिपूर्ण तरीके से हर दिन एक संगठन से पांच लोग यानी करीब 500 किसान बस में बैठ कर जाएंगे।












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