'आओगे जब तुम ओ साजना' गायक उस्ताद राशिद खान का 55 साल की उम्र में निधन, कैंसर से थे पीड़ित

Singer Ustad Rashid Khan Passed Away: संगीत की दुनिया से एक बुरी खबर सामने आई है। दिग्गज शास्त्रीय गायक उस्ताद राशिद खान का लंबी बीमारी के बाद मंगलवार को निधन हो गया है। उन्होंने कोलकाता के एक अस्पताल में 55 साल की उम्र में आखिरी सांस ली।

उनका पार्थिव शरीर आज शाम तक कोलकाता के पीयरलेस हॉस्पिटल में रखा जाएगा। उनके पार्थिव शरीर को रात के लिए पीस हेवन, कोलकाता भेजा जाएगा। जिसके बाद उनका अंतिम संस्कार 10 जनवरी को होगा।

Music maestro Rashid Khan

उस्ताद राशिद खान का कोलकाता के एक अस्पताल में प्रोस्टेट कैंसर का इलाज चल रहा था, लेकिन आखिरकार वो इस लड़ाई को हार गए। 55 वर्षीय शास्त्रीय गायक वेंटिलेटर पर थे और उन्हें ऑक्सीजन सपोर्ट मिल रहा था।

ममता बनर्जी ने जताया दुख

पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने उनके निधन पर शोक व्यक्त किया। उन्होंने बताया कि उस्ताद राशिद खान को कल उनके अंतिम संस्कार के दौरान आखिरी सलामी दी जाएगी। उनके पार्थिव शरीर को अंतिम दर्शन के लिए रवीन्द्र सदन में रखा जाएगा।

कोलकाता में चल रहा था इलाज

पिछले महीने सेरेब्रल अटैक का सामना करने के बाद उनका स्वास्थ्य खराब हो गया था। रामपुर-सहसवान घराने के उस्ताद राशिज खान ने शुरुआत में टाटा मेमोरियल कैंसर अस्पताल में इलाज कराया। हालांकि बाद के फेज में उन्होंने विशेष रूप से कोलकाता में अपना इलाज जारी रखने का विकल्प चुना।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक उस्ताद शुरू में इलाज पर पॉजिटिव रिस्पॉन्स दे रहे थे। उत्तर प्रदेश के बदायूं में जन्मे राशिद खान, जो उस्ताद गुलाम मुस्तफा खान के भतीजे भी थे, उन्होंने अपना प्रारंभिक प्रशिक्षण अपने नाना उस्ताद निसार हुसैन खान (1909-1993) से हासिल किया।

चाचा गुलाम मुस्तफा खान ने पहचानी थी प्रतिभा

उनकी संगीत प्रतिभा को सबसे पहले उनके चाचा गुलाम मुस्तफा खान ने पहचाना, जिन्होंने मुंबई में प्रारंभिक प्रशिक्षण दिया। हालांकि, प्रारंभिक प्रशिक्षण निसार हुसैन खान से उनके निवास स्थान बदायूं में प्राप्त हुआ। महज ग्यारह साल की उम्र में राशिद खान ने अपना पहला संगीत कार्यक्रम दिया और अगले वर्ष 1978 में, उन्होंने दिल्ली में आईटीसी संगीत कार्यक्रम में मंच की शोभा बढ़ाई।

इसके बाद अप्रैल 1980 में जब निसार हुसैन खान कलकत्ता में आईटीसी संगीत रिसर्च अकादमी (एसआरए) में चले गए, तो 14 साल की उम्र में राशिद खान भी अकादमी का हिस्सा बन गए। खान ने शास्त्रीय हिंदुस्तानी संगीत को हल्के संगीत शैलियों के साथ मिश्रित करने का साहस किया और पश्चिमी वाद्ययंत्र वादक लुइस बैंक्स के साथ संगीत कार्यक्रम सहित प्रयोगात्मक सहयोग में लगे रहे। इसके अलावा उन्होंने जुगलबंदियों में भाग लेकर, सितारवादक शाहिद परवेज़ और अन्य संगीतकारों के साथ मंच साझा करके अपनी बहुमुखी प्रतिभा का प्रदर्शन किया।

कई हिट बॉलीवुड गाने दिए

शास्त्रीय संगीत के अलावा उस्ताद राशिद खान ने फिल्म इंडस्ट्री को भी कई शानदार और सदाबहार गाने दिए हैं। इनमें फिल्म जब वी मेट का 'आओगे जब तुम साजना' गाना, तुझे याद करते-करते, तू बनजा गली बनारस की उनके प्रसिद्ध गीत हैं।

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