सिंतबर 2017 से हिंद महासागर में नहीं दाखिल हो पाई चीन की एक भी पनडुब्बी
नई दिल्ली। सितंबर 2017 से चीन (China) की किसी भी परमाणु या फिर पारंपरिक पनडुब्बी (Submarine) ने हिंद महासागर (Indian Ocean) में घुसपैठ करने की हिमाकत नहीं की है। नौसेना के टॉप सूत्रों की ओर से इस बात की जानकारी दी गई है। इस नए खुलासे के बाद चीन की पीपुल्स लिब्रेशन आर्मीज नेवी की लान्ग रेंज डेप्लॉयमेंट पर सवाल खड़े होने लगे हैं। साल 2017 में ही चीन और भारत के बीच डोकलाम विवाद हुआ था। जून 2017 में इस विवाद की शुरुआत हुई थी और 72 दिनों में यह जाकर खत्म हो सका था।

साल 2018 में सीमा के करीब आकर लौटी
भारतीय नौसेना (Indian Navy) के सूत्रों की ओर से बताया गया है कि आखिरी बार चीनी पनडुब्बी अगस्त 2018 में भारतीय जल सीमा क्षेत्र के करीब आई थी। लेकिन वह सुनादा स्ट्रेट्स से वापस अपनी सीमा में लौट गई थी। रक्षा सूत्रों की ओर से बताया गया है कि पनडुब्बी रेस्क्यू वेसेल भी सिर्फ कोलंबो तक आया और वहीं से वापस लौट गया था। साल 2017 से पहले हर तीन माह में चीन की तरफ से पारंपरिक और परमाणु पनडुब्बी को हिंद महासागर में तैनाती के लिए भेजा जाता था। चीनी पनडुब्बी या तो जिबूती में तैनात रहती या फिर पाकिस्तान के नेवी बेस कराची में इसे डेप्लॉय किया जाता था। चीन ने दिसंबर 2013 से अपनी पनडुब्बियों को हिंद महासागर क्षेत्र में तैनात करना शुरू कर दिया था।
चीन की नौसेना पर पड़ा असर
चीन की पनडुब्बियां साउथ ईस्ट एशिया का रास्ता तय करती, मलाका स्ट्रैट्स को पार करती और फिर हिंद महासागर में दाखिल हो जाती। चीनी पनडुब्बियों को अक्सर रख-रखाव की समस्या से जूझना पड़ता है और ऐसा लगता है कि अब इसका असर चीन की नौसेना लंबी दूरी की डेप्लायॅमेंट रणनीति पर पड़ने लगा है। चीनी नेवी, हिंद महासागर और अरब सागर में अक्सर अपने युद्धपोत को भेजती आई है। चीन के मुताबिक उसे समुद्री डाकुओं से निबटने के लिए अदन की खाड़ी में तैनाती की जरूरत है और इसलिए अरब सागर में उसके लिए डेप्लॉयमेंट जरूरी है। सूत्रों की ओर से कहा गया है कि भारत अपने हितों के लिए जरूरी क्षेत्रों पर नजर रखे हुए है। भारत की ओर से चीन की हर गतिविधियों को ट्रैक किया जा रहा है।
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