नरेंद्र मोदी और बाराक ओबामा के पहले 100 दिन में हैं 10 समानताएं
[ऋचा बाजपेयी] नरेंद्र मोदी और बराक ओबामा, दुनिया के दो सबसे शक्तिशाली देश के मुखिया। जहां बराक ओबामा दोबारा अमेरिका के राष्ट्रपति पद की जिम्मेदारी संभाल रहे हैं तो वहीं भारत के प्रधानमंत्री सफलतम मुख्यमंत्रियों में शुमार हो चुके हैं।
नरेंद्र मोदी ने जिस समय प्रधानमंत्री पद की जिम्मेदारी ली थी उस समय उनके सामने कई चुनौतियां थीं लेकिन वहीं दुनिया में एक तबका मान रहा था कि मोदी शायद इस देश की किस्मत बदल सकते हैं। कुछ इसी तरह से बराक ओबामा के लिए भी लोगों ने अपनी राय जाहिर की थी। नरेंद्र मोदी की सरकार ने 100 दिन पूरे कर लिए हैं।
ऐसे में हमने सोचा कि क्यों न अमेरिका के राष्ट्रपति बराक ओबामा और भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के पहले 100 दिनों में मौजूद कुछ एक जैसी बातों की पड़ताल की जाए।
एक नजर डालिए उन खास बिंदुओं पर कि आखिर कैसे नरेंद्र मोदी और बराक ओबाम के पहले 100 दिनों में कौन सी बातें एक जैसी हैं।
आर्थिक चुनौती
ओबामा: वर्ष 2008 में राष्ट्रपति पद संभाला था, उस समय अमेरिका की जीडीपी ग्रोथ -0.3% की दर से बढ़ रही थी। ओबामा के सामने सबसे बड़ा चैलेंज इसे पटरी पर लाना था।
मोदी: वर्ष 2014 में मोदी ने भारत के प्रधानमंत्री का पद संभाला तो देश की जीडीपी दर 4.5% के आसपास ही थी। उनके लिये भी यह सबसे बड़ी चुनौती रही।
सिटिजन इक्नॉमिक प्लान
ओबामा: पहले 100 दिनों के दौरान 787 बिलियन डॉलर का इकोनॉमिक प्लान लांच किया। हेल्थ इंश्योरेंस, वर्किंग फैमिली के योजनाएं और महिलाओं के लिए खास स्कीम शामिल थीं।
मोदी: 'प्रधानमंत्री जन धन योजना' की शुरुआत की है ताकि हर घर के सदस्य के पास अपना एक बैंक अकाउंट हो सके। हर घर की आर्थिक स्थिति में सुधार हो सके।
महिला सशक्तिकरण
ओबामा: जेंडर आइडेंटी का समर्थन किया गया ओबामा ने कन्या भ्रूण हत्याओं को रोकने की बात का समर्थन किया था।
मोदी: उसी अंदाज में महिलाओं और लड़कियों को आगे बढ़ाने के लिए प्रेरित करते नजर आते हैं।
सर्वे रिपोर्ट
ओबामा: पहले 100 दिनों पर गैलप ने जब सर्वे किया तो 65 प्रतिशत अमेरिकियों ने ओबामा का समर्थन किया था। वहीं 29 प्रतिशत लोगों को ओबामा का काम पसंद नहीं आया था।
मोदी: पहले 100 दिन में हुए सर्वेक्षण में करीब 57 प्रतिशत लोगों ने मोदी का समर्थन किया और फिर से प्रधानमंत्री के तौर पर देखने की इच्छा जाहिर की है।
दुनिया की नजरें
ओबामा:जब वे राष्ट्रपति बने थे तो पूरी दुनिया की नजरें अमेरिका पर टिकी थीं। हर कोई जानना चाहता था कि बराक ओबामा इराक और अफगानिस्तान को लेकर क्या प्रतिक्रिया देते हैं।
मोदी: अमेरिका, चीन, पाकिस्तान से लेकर ऑस्ट्रेलिया और जर्मनी ने यह जानने की कोशिश की कि एक कट्टर सोच वाले मोदी आखिर अपने पड़ोसियों (खासकर पाकिस्तान) के साथ कैसे डील करेंगे।
मीडिया कवरेज
ओबामा: पहले 100 दिनों को अमेरिकी और ब्रिटिश मीडिया ने जितनी कवरेज दी थी, उतनी किसी भी और प्रधानमंत्री के कार्यकाल को नहीं मिली थी।
मेादी: न केवल भारत बल्कि पूरी दुनिया की मीडिया नरेंद्र मोदी के पहले 100 दिनों के बारे में बात कर रही है।
मीडिया से इंटरैक्शन
ओबामा: उन्होंने मीडिया से पहले 100 दिनों के दौरान ज्यादा इंट्रैक्शन नहीं किया था। यहां तक कि उन्होंने प्रेस को ही बैन कर दिया था।
मोदी: आप भी मीडिया से दूरी बनाये हुए हैं। फिलहाल सोशल मीडिया के जरिए ही मीडिया से मुखातिब हो रहे हैं।
बंद हुईं योजनाएं
ओबामा: आप ने जॉर्ज डब्लूय बुश के सभी फेडरल रेगुलेशंस प्रस्तावों को खत्म कर दिया था। ओबामा की ओर से तब अपने खुद के नए आदेश जारी किए गए थे।
मोदी: पीएम ने 100 दिनों के अंदर ही पुरानी सरकारों के द्वारा चलाए गए योजना आयोग को बंद करने का ऐलान कर दिया है।
सख्त नियम
ओबामा: व्हाइट हाउस में मौजूद कर्मियों और लॉबिस्ट्स के काम करने के तरीकों में सुधार लाने के लिए नियमों को पहले से ज्यादा कड़ा कर दिया था। व्हाइट हाउस में कर्मियों को अपने रिश्तेदारों का नौकरी पर न रखने का सख्त आदेश जारी किया था।
मोदी: पीएमओ कर्मियों को ठीक से काम करने की नसीहतें दीं। मोदी ने भी पीएमओ में अधिकारियों को सख्त निर्देश देते हुए कहा है कि वो अपने रिश्तेदारों या दोस्तों को वरीयता नहीं दें।
शिखर सम्मेलन
ओबामा: राष्ट्रपति बनने के ठीक बाद बराक ओबामा ने अमेरिकियों के पांचवें शिखर सम्मेलन में शिरकत की। यहां पर उन्होंने वेनेजुएला के राष्ट्रपति हृयूगो शावेज से मुलाकात की जो कि हमेशा से वाशिंगटन के कट्टर दुश्मन रहे थे। ओबामा ने शावेज से हाथ मिलाया।
मोदी: नरेंद्र मोदी ने प्रधानमंत्री बनने के बाद ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में भाग लेने के लिए ब्राजील गए। ओबामा की ही तरह उन्होंने भी भारत के लिए तनाव की वजह से बने रहने वाले चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग से मुलाकात की और उनसे हाथ मिलाया।













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