कांग्रेस नेता सिद्धारमैया की चुनाव आयोग को सलाह, EC को स्वतंत्र और निष्पक्ष तरीके से कराना चाहिए इलेक्शन
कांग्रेस नेता सिद्धारमैया ने चुनाव की तारीखों के ऐलान के बीच कहा कि चुनाव आयोग को कर्नाटक में स्वतंत्र और निष्पक्ष तरीके से चुनाव कराना चाहिए। उनका ये बयान ऐसे में समय में आया है, जब आयोग ने तारीखों का ऐलान किया है।

Karnataka Assembly Election 2023: कर्नाटक विधानसभा चुनाव की तारीखों का ऐलान होते ही राज्य में सियासी सरगर्मी तेजी हो गई है। प्रदेश में चुनाव के लिए 10 मई को वोटिंग होगी और 13 मई को मतगणना होनी है। इस बीच कांग्रेस नेता सिद्धारमैया ने चुनाव आयोग के कामकाज पर संदेह जताते हुए कहा कि, चुनाव आयोग को स्वतंत्र और निष्पक्ष तरीके से चुनाव कराना चाहिए।
सीएम बोम्मई ने कांग्रेस पर लगाया गंभीर आरोप
वहीं दूसरी ओर कर्नाटक के सीएम बसवराज बोम्मई ने चुनाव कार्यक्रम के ऐलान के बीच कांग्रेस पर गंभीर आरोप लगाया है। उन्होंने कहा कि, कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष डीके शिवकुमार हमारी पार्टी के विधायकों को कॉल करके सीट ऑफर कर रहे हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि अगर कांग्रेस अगर अपनी स्थिति मजबूत होने का दावा कर रही है तो फिर हमारे विधायकों को क्यों फोन कर रहे हैं। ये कांग्रेस की सही स्थिति बताने के लिए काफी है।
डीके शिवकुमार बोले इस सरकार को किया जाए बर्खास्त
इधर, कर्नाटक कांग्रेस प्रमुख डीके शिवकुमार ने कहा कि, 'हम चुनाव के लिए पूरी तरह तैयार हैं, हम चाहते हैं कि इस सरकार को बर्खास्त किया जाए। यह चुनाव विकासोन्मुख होगा, भ्रष्टाचार मुक्त राज्य और देश के लिए होगा। भ्रष्टाचार अपने चरम पर है और पीएम मोदी ने इसे प्रोत्साहित किया, उन्होंने अपनी पार्टी के नेताओं के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की।
बीजेपी ने 2018 के चुनाव में सबसे बड़ी पार्टी के रूप में बनाई पहचान
कर्नाटक दक्षिण में एकमात्र ऐसा राज्य है जहां भाजपा सत्ता में रही है। साल 2018 के चुनाव में बीजेपी ने 224 सदस्यीय विधानसभा में 104 सीटें जीतकर सबसे बड़ी पार्टी के रूप में अपनी पहचान बनाई। दूसरी ओर कांग्रेस ने 80 सीटें जीतीं, जबकि जनता दल (सेक्युलर) की संख्या 37 थी। हालांकि, कांग्रेस और जद (एस) ने गठबंधन सरकार बनाई। जिसमें एचडी कुमारस्वामी ने शपथ ली। जुलाई 2019 में कांग्रेस-जद (एस) के कुछ विधायकों के विद्रोह के कारण गठबंधन सरकार गिर गई और राज्य में बीजेपी पार्टी के सबसे बड़े नेता बीएस येदियुरप्पा के नेतृत्व में भाजपा की सत्ता में वापसी हुई।












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