सैयद गिलानी को बंद करने की मांग कौन करेगा?
नई दिल्ली(विवेक शुक्ला) हालांकि आजकल सारे देश में पृथकतावादी नेता आलम भट्ट की रिहाई को लेकर हंगामा हो रहा है, पर घोऱ देश द्रोही सैयद अली शाह गिलानी को जेल में बंद करने की कोई मांग नहीं कर रहा।

पाक उच्चायुक्त से मिले
वे दिल्ली में हैं और पाकिस्तान के उच्चायुक्त ने उनसे मुलाकत की। फिर गिलानी ने बयान दिया और कहा कश्मीर भारत का अंग नहीं है। कोई नेता नहीं कह रहे कि उनको जेल में डालो। क्यों?
देशभक्त नाराज
बेशक, आलम बट्ट की रिहाई पर देश में देशभक्तों का समुद्री ज्वार उभर कर आना समझ आता है। वरिष्ठ चिंतक अवधेश कुमार ठीक कहते हैं कि संसद में केन्द्र सरकार से प्रश्न पूछिये। सरकार पर हमला करिए। आखिर मुफ्ती की सरकार अकेले तो है नहीं।
यासिन मलिक लाहौर में किसके साथ धरने पर बैठा था? कितना हंगामा हुआ। वह आया। दिल्ली हवाई अड्डे पर उतरा। आज कश्मीर में आराम से रह रहा है। उसके साथ तो कुछ नहीं किया गया। तो एक आदमी पर इतना चिल्ल पों क्यों?
खराब संकेत
अवधेश कुमार आगे कहते हैं हालांकि इससे जो संकेत जा रहा है वह खराब है। अलगाववादियों को छूट देने का संदेश निकल रहा है जो खतरनाक है। ऐसा संकेत नहीं जाना चाहिए। मुफ्ती के रवैये से यही संदेश जा रहा है। भाजपा को इससे पूरी राजनीतिक क्षति हो रही है।
बेहतर होगा कि आतंकी की रिहाई के मसले परकेन्द्र सरकार से पूछने के साथ हमारे बड़े नेता मुफ्ती मोहम्मद सईद से भी बात करें। उनसे पूछें कि वे क्यों ऐसा कर रहे हैं? कांग्रेस के नेता पूछ सकते हैं, वामपंथी पूछ सकते हैं...बसपाई, सपाई पूछ सकते हैं। कुछ नेताओं का शिष्टमंडल वहां जा सकता है। क्यों नहीं इसकी पहल विपक्ष के प्रमुख नेता करते?












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