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कौन है शोपियां में सेना को चकमा देकर भागने वाला लश्‍कर का आतंकी जुनैद मट्टू

19 वर्ष के जुनैद मट्टू को दिसंबर 2016 में लश्‍कर ने साउथ कश्‍मीर में अपना कमांडर बनाया था। उसे लश्‍कर के आतंकी माजिद जरगर के बाद कमांडर बनाने का ऐलान लश्‍कर की ओर से किया गया था।

श्रीनगर। गुरुवार से ही साउथ कश्‍मीर के शोपियां में इंडियन आर्मी का सबसे बड़ा सर्च ऑपरेशन लॉन्‍च किया गया है। इस ऑपरेशन का मकसद साउथ कश्‍मीर में मौजूद उन 30 आतंकियों का सफाया करना है जिनका एक वीडियो पिछले दिनों सोशल मीडिया पर आया और यह वायरल हो गया था। ऐसी खबरें आ रही हैं कि इस सर्च ऑपरेशन में लश्‍कर-ए-तैयबा का कमांडर जुनैद मट्टू भाग निकला है। जुनैद के भागने में लोगों ने काफी मदद की और वह कुलगाम के खुदवानी जिले से भागा है।

कश्‍मीर का अगला बुरहान वानी

कश्‍मीर का अगला बुरहान वानी

19 वर्ष के जुनैद मट्टू को दिसंबर 2016 में लश्‍कर-ए-तैयबा ने साउथ कश्‍मीर के लिए अपना कमांडर नियुक्‍त किया था। जुनैद को उस समय लश्‍कर ने अपना कमांडर बनाया था जब उसके एक और कमांडर माजिद जरगर को एनकाउंटर में सुरक्षाबलों ने मार दिया था। वर्ष 2015 में लश्‍कर ने 70 आतंकवादियों की भर्ती की थी और जुनैद उनमें से ही एक था।

क्‍यों हैं साउथ कश्‍मीर अहम

क्‍यों हैं साउथ कश्‍मीर अहम

एक वर्ष बाद ही लश्‍कर ने उसे इतनी बड़ी जिम्‍मेदारी सौंप दी थी। साउथ कश्‍मीर लश्‍कर के लिए बहुत ही अहम है क्‍योंकि यहां से कश्‍मीर में जुलाई 2016 में अशांति फैलने का दौर शुरू हुआ था। आतंकी भी इसी जगह से कश्‍मीर में घुसपैठ करते हैं। मट्टू को कश्‍मीर का अगला बुरहान वानी तक कहा गया था।

टेक सेवी मट्टू

टेक सेवी मट्टू

जुनैद मट्टू एक टेक सेवी युवा है जिस पर इंटेलीजेंस ब्‍यूरों करीब से नजर रख रहा था। वह कश्‍मीर के कुलगाम जिले का रहने वाला है। वर्ष 2015 में वह गायब हो गया था। इसके बाद उसे पिता अहमद मट्टू ने पुलिस में रिपोर्ट लिखवाई थी। कुछ दिनों बाद अहमद को पता चला कि उसके बेटे ने लश्‍कर-ए-तैयबा को ज्‍वॉइन कर लिया है।

कब दिखा पहली बार

कब दिखा पहली बार

मट्टू को पहली बार जून 2016 में अनंतनाग में उस समय देखा गया जब एक सीसीटीवी फुटेज की पड़ताल की जा रही थी। मट्टू उन आतंकियों के ग्रुप में शामिल था जिन्‍होंने अनंतनाग के एक पुलिस स्‍टेशन पर हमला किया था। इस फुटेज में मट्टू को दो पुलिसकर्मियों की हत्‍या के बाद कार से भागते हुए देखा गया था। तीन जून 2016 को बीएसएफ की बस पर हुए आतंकी हमले में भी मट्टू का ही हा था। इस हमले में तीन बीएसएफ जवान शहीद हो गए थे तो सात घायल थे।

 पांच लाख का इनाम

पांच लाख का इनाम

मट्टू के सिर पर पांच लाख रुपए का इनाम घोषित किया गया है। मट्टू का कद काफी तेजी से लश्‍कर के अंदर बढ़ा था। साधारण तौर पर एक आतंकी को कमांडर बनने में तीन से पांच वर्ष तक का समय लग जाता है। लेकिन मट्टू सिर्फ एक वर्ष के अंदर ही लश्‍कर का कमांडर बन गया।

दूसरे दर्जे का आतंकी

दूसरे दर्जे का आतंकी

जब मट्टू गायब हुआ तो पुलिस ने उसे बी कैटेगरी का आतंकवादी घोषित किया था। इसी तरह का केस उन 69 आतंकवादियों पर भी दर्ज हुआ जिन्‍होंने उसके साथ लश्‍कर ज्‍वॉइन किया था। पुलिस का कहना है कि लश्‍कर ने ऐसे समय पर आतंकियों की भर्ती की थी जब संगठन का मनोबल गिरने लगा था।

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