शिवसेना ने सामना में लिखा- सफाई कर्मचारियों का सवाल पैर का नहीं बल्कि पेट का है
नई दिल्ली: शिवसेना ने मंगलवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की कुंभ मेला में सफाई कर्मचारियों के पैर पखारने के लिए प्रशंसा की। लेकिन इसके साथ ही उसने कहा कि सफाई कर्मचारियों का सवाल पैर का नहीं बल्कि पेट का है। शिवसेना की ये टिप्पणी पीएम मोदी के उत्तरप्रदेश में कुंभ मेले में स्नान करने और कुंभ मेला में सफाई रखने में सफाई कर्मचारियों के प्रयासों की प्रशंसा करते हुए चुनिंदा कर्मियों के पैर पखारने(चरण वंदना) के दो दिन बाद आई है।

शिवसेना ने अपने मुखपत्र सामना में लिखा कि सफाई कर्मचारियों के पांव पखारने के लिए मोदी को बधाई देनी चाहिए लेकिन उनसे जुड़ा सवाल उनके पेट के बारे में है ना कि उनके पैर के बारे में। पीएम मोदी की कार सेवा तब ही सफल होगी जब ये सफाई कर्मचारी अपने पैरों पर खड़े होने के काबिल होंगे। गौरतलब है कि रविवार को पीएम मोदी ने उत्तर प्रदेश के गोरखपुर में 75,000 करोड़ रुपये की प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना की शुरुआती की थी, जिसमें किसानों के खाते में 2,000 रुपये की पहली किस्त ट्रांसफर की गई।
देश में चुनावी मौसम शुरू
शिवसेना ने इसका हवाला देते हुए कहा कि चुनावी मौसम शुरू हो गया है और सरकार ने पीएम किसान योजना और निर्माणाधीन घरों पर जीएसटी 12 प्रतिशत से घटाकर पांच प्रतिशत करने सहित कई फैसले लिए हैं। शिवसेना ने सामना में इन सरकार पर चुनाव को देखते हुए ऐसी घोषणाएं करने के आरोपों पर कहा कि हालांकि राजनीतिक फायदे के लिए चुनाव से पहले ऐसे बजट बनाए जाते हैं। सत्ता में रहने वाला हर राजनीतिक दल ऐसा करता है।
तीन राज्यों में हार का दिया हवाला
सामना में आगे लिखा गया कि 26 जनवरी को पीएम मोदी ने हिंदु वोटरों को संदेश देने के लिए भगवा साफा पहन रखा था। हालांकि भाजपा पिछले साल तीन राज्यों में चुनाव हार गई, जो परंपरागत रुप से हिंदुत्ववादी हैं। इस हार का संबंध राजस्थान छत्तीसगढ़ और मध्यप्रदेश था जो हिंदी हार्टलैंड वाले राज्य कहलाते हैं। यहां पिछले साल नवंबर में चुनाव हुए थे।












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