किसानों की खातिर राहत पैकेज के लिए सड़क पर उतरे शिवराज 'मामा'

सरकार ने एक तरफ राज्यव्यापी बंद का आह्वान किया, वहीं दूसरी तरफ मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के नेतृत्व में राजधानी में रंगमहल चौराहे के पास अनशन भी किया गया। इस दौरान विभिन्न संगठनों के प्रतिनिधियों ने मौके पर पहुंचकर मुख्यमंत्री राहत कोष में दान देने का ऐलान किया। मुख्यमंत्री चौहान ने कहा कि किसानों को आंसू बहाने की जरूरत नहीं है, सरकार उनके साथ है। उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार केंद्र सरकार से राहत राशि मांग रही है, लेकिन केंद्र भेदभाव कर रहा है। केंद्र के पास जनता का पैसा है और वह पैसा जनता की मदद के लिए देने को तैयार नहीं है।
चौहान ने कहा कि वह राहत पैकेज के लिए दिल्ली तक गए, मगर प्रधानमंत्री ने मुलाकात का समय नहीं दिया। उनका कहना है कि वह एक बार फिर अपने मंत्रियों के साथ दिल्ली जाकर मप्र के किसानों का हक मांगेंगे। चौहान की मांग है कि मध्य प्रदेश में हुई ओलावृष्टि को राष्ट्रीय आपदा घोषित की जाए और बीमा योजना को व्यवहार में लाया जाए। राज्य में पिछले दिनों हुई बेमौसम बारिश से 10 हजार से अधिक गांवों में खेतों में खड़ी फसल बर्बाद हुई।
राज्य सरकार ने दो हजार करोड़ रुपये किसानों की मदद के लिए मंजूर किए हैं और केंद्र सरकार से पांच हजार करोड़ रुपये की मदद मांगी है, जिसे पूरा नहीं किया गया है। केंद्र सरकार पर भेदभाव का आरोप लगाते हुए भाजपा ने गुरुवार को आधे दिन का प्रदेशव्यापी बंद और सरकार के अनशन का ऐलान किया था। बंद पूर तरह सफल रहा।












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