MP: उपचुनाव की घोषणा से पहले शिवराज ने पलटा पिछली कांग्रेस सरकार का बड़ा फैसला, अध्यादेश लाकर किया बदलाव

भोपाल। मंगलवार को निर्वाचन आयोग ने मध्य प्रदेश में खाली हुईं 28 विधानसभा सीटों पर उपचुनाव की घोषणा कर दी है। 3 नवम्बर को चुनाव की घोषणा की जाएगी। इसके पहले ही प्रदेश की शिवराज सरकार (Shivraj government) ने पिछले कांग्रेस शासनकाल का एक बड़ा फैसला पलट दिया है। अब नगर पालिका के महापौर का चुनाव सीधे जनता द्वारा किया जाएगा। इस बारे में सरकार ने अध्यादेश जारी कर दिया है। बता दें कि उपचुनाव के बाद राज्य में निकाय चुनाव संभावित हैं।

सरकार ने नगरीय निगम एक्ट में किया बदलाव

सरकार ने नगरीय निगम एक्ट में किया बदलाव

कांग्रस की पूर्ववर्ती कमलनाथ सरकार ने नगरपालिका निगम एक्ट में बदलाव किया था। इसके तहत 20 साल बाद अप्रत्यक्ष प्रणाली से महापौर और नगर पालिका का अध्यक्ष बनाने का फैसला किया था। भाजपा सरकार ने कांग्रेस के इस फैसले को पलट दिया है। अब जनता सीधे अपना महापौर और अध्यक्ष का चुनेगी। इसके साथ ही निकायों का वार्ड परिसीमन चुनाव के दो महीने के बजाय छह महीने पहले करने का संशोधन भी किया गया है।

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    6 महीने पहले ही कर ली थी तैयारी

    6 महीने पहले ही कर ली थी तैयारी

    भाजपा सरकार ने छह महीने पहले ही भाजपा सरकार ने इस फैसले को पलटने की तैयारी कर ली थी। कैबिनेट ने नगरीय निकाय एक्ट में बदलाव पर मुहर भी लगा दी थी। सरकार इसे पिछले विधानसभा सत्र में पेश भी करने वाली थी। यहां तक की कार्यसूची में शामिल भी कर लिया गया था, लेकिन कांग्रेस की आपत्ति को देखते हुए एन वक्त पर इसे वापस ले लिया गया था। चूकि प्रदेश में अभी उपचुनाव होने हैं और संभावना है कि इसके बाद ही निकाय चुनाव भी होंगे। ऐसे में शिवराज सरकार इसमें बदलाव के लिए अध्यादेश लेकर आई है।

    16 नगर निगम पर भाजपा का कब्जा

    16 नगर निगम पर भाजपा का कब्जा

    दरअसल कांग्रेस की कमलनाथ सरकार ने राज्य का सियासी गणित देखते हुए महापौर और नगर पालिका का अध्यक्ष का चुनाव सीधे जनता की बजाय अप्रत्यक्ष तरीके से कराने का फैसला किया था। यहां ये जानना जरूरी हो जाता है कि प्रदेश में 16 नगर निगम हैं और सभी पर भाजपा का कब्जा था। वहीं नगरीय निकाय में भी अधिकतक पर भाजपा काबिज थी। हालांकि इन सभी कार्यकाल अब समाप्त हो चुका है। यही वजह थी कि जब कांग्रेस ने नगरीय निकाय एक्ट में परिवर्तन किया था तो भाजपा ने इसका जमकर विरोध किया था।

    वार्ड परिसीमन का नियम भी बदला

    वार्ड परिसीमन का नियम भी बदला

    वहीं कांग्रेस की तत्कालीन सरकार ने वार्ड परिसीमन की कार्यवाही को चुनाव के दो महीने पहले करने के लिए संशोधन कर दिया था। पहले ये कार्यवाही चुनाव के छह महीने पहले किया जाने का नियम था। भाजपा की शिवराज सरकार ने इस नियम में भी अध्यादेश के जरिए संशोधन कर दिया है। अब यह कार्यवाही एक बार फिर छह महीने पहले ही पूरी करनी होगी।

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