नामांकन भरने के बाद शिवपाल यादव बोले- उत्तर प्रदेश में सबसे बड़ी पार्टी के रूप में उभरेंगे

नई दिल्ली। समाजदवादी पार्टी से नाखुश होकर अपनी अलग पार्टी बनाने वाले प्रगतिशील सामजवादी पार्टी (लोहिया) के अध्यक्ष शिवपाल सिंह यादव ने शनिवार को दावा किया है कि लोकसभा चुनाव में यूपी में बीजेपी के साथ उनकी सीधी टक्कर है। इसके अलावा शिवपाल सिंह यादव ने कहा कि उनकी पार्टी राज्य में सबसे बड़ी पार्टी के रूप में उभरेगी।

शिवपाल के सामने सपा से हैं अक्षय यादव हैं उम्मीदवार

शिवपाल के सामने सपा से हैं अक्षय यादव हैं उम्मीदवार

बता दें कि प्रगतिशील समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष शिवपाल सिंह यादव ने शनिवार को फिरोजाबाद लोकसभा सीट से अपना नामांकन किया। इस सीट से समाजवादी पार्टी ने अक्षय यादव को उम्मीदवार बनाया है जो कि सपा के जनरल सेक्रेटरी राम गोपाल यादव के बेटे हैं। अक्षय इस सीट से मौजूदा सांसद भी हैं। ऐसे में फिरोजाबाद सीट पर इस बार एक ही परिवार के बीच में कड़ी टक्कर देखने को मिल सकती है। न्यूज एजेंसी एएनआई के सवाल के जवाब में शिवपाल सिंह यादव ने कहा कि यहां उनको रिलेशन से कोई लेना देना नहीं है। जनता की मांग के बाद मैं यहां से नामांकन करने के लिए आया।

जनता की डिमांड पर यहां आया हूं

जनता की डिमांड पर यहां आया हूं

शिवपाल यादव ने कहा कि मैं चुनाव मैदान में हूं इसलिए मेरा पूरा ध्यान जनता के अधिकारों की ओर है। जनता की मांग के बाद मैं यहां से नामांकन करने के लिए आया। इसके अलावा शिवपाल यादव ने यह भी दावा किया कि उनकी पार्टी राज्य की कुछ स्थानीय पार्टियों के साथ गठबंधन में है। शिवपाल सिंह यादव ने कहा कि हमने हम अभी तक उत्तर प्रदेश में 41 उम्मीदवारों के नाम का ऐलान कर चुके हैं, इसके अलावा 11 राज्यों में भी प्रत्याशियों के नाम का ऐलान किया गया है। उन्होंने कहा कि हमने बहुजन मुक्ति पार्टी और पीस पार्टी के साथ उनका गठबंधन हैं।

2014 के चुनाव में बीजेपी ने जीती थी 73 सीटें

2014 के चुनाव में बीजेपी ने जीती थी 73 सीटें

बता दें कि साल 2014 में हुए लोकसभा चुनाव में भारतीय जनता पार्टी ने उत्तर प्रदेश की 80 लोकसभा सीटों में 73 पर जीत दर्ज की थी। जबकि उस समय यूपी की सत्ता में रही समाजवादी पार्टी को मात्र पांच सीटे मिली थीं। जबकि उस समय केंद्र की सत्ता में बैठी कांग्रेस पार्टी को यूपी में मात्र दो सीट ही मिली थी। वहीं मायावती की अगुवाई वाली बीएसपी के खाते में एक भी सीटें नहीं आईं थी। लेकिन इस बार यूपी की राजनीतिक में कई बदालव देखने को मिले हैं। खासकर सपा-बसपा का एक हो जाने से बाकी पार्टियों के लिए मुश्किल खड़ी हो सकती है।

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