शिवसेना के निशाने पर फिर आई बीजेपी, कहा-पाक को सबक सिखाने के लिए चुनाव का ना करें इंतजार
मुंबई। बीजेपी की सहयोगी पार्टी शिवसेना ने पुलवामा आतंकी हमले को लेकर पाकिस्तान को जवाब देने के केंद्र सरकार के रुख पर सवाल खड़े कर दिए हैं। शिवसेना ने मोदी सरकार से कहा कि वह पाकिस्तान को सबक सिखाने के लिये लोकसभा चुनाव तक इंतजार ना करे। शिवसेना के मुखपत्र 'सामना' में प्रकाशित एक लेख में कड़े शब्दों में कहा कि मोदी सरकार हमले की निंदा करने के लिये अमेरिका और यूरोपीय देशों पर निर्भर ना रहे।

सोशल मीडिया पर चल रहा यह युद्ध बंद होना चाहिये
शिवसेना ने संपादकीय में साफ तौर पर कहा कि, भारत सरकार को समर्थन के लिये अमेरिका और यूरोपीय देशों की ओर देखने के बजाय खुद ही लड़ाई लड़नी होगी। शिवसेना ने कहा कि सोशल मीडिया पर भारत और पाकिस्तान के बीच युद्ध चल रहा है। शिवसेना के मुताबिक यह लोकसभा चुनाव शुरू होने की निशानी है। सोशल मीडिया पर चल रहा यह युद्ध बंद होना चाहिये। शिवसेना ने सामना में लिखा कि, सैनिकों की शहादत और आतंकी हमले चुनाव जीतने का औजार बन चुके हैं। इस तरह देश दुश्मनों का सामना कैसे करेगा।

पाकिस्तान को सबक सिखाने के लिये सिर्फ बयानबाजी हो रही है
शिवसेना ने कहा कि, पाकिस्तान को सबक सिखाने के लिये सिर्फ बयानबाजी हो रही है। पहले कार्रवाई करो और फिर बोलें। हम पठानकोट, उरी और अब पुलवामा (आतंकवादी हमलों) के बाद चेतावनी दे रहे हैं। शिवसेना ने कहा, हमले को लेकर डोनाल्ड ट्रंप, फ्रांस और ईरान ने जो कहा है उसी को लेकर हम अपनी पीठ थपथपा रहे हैं।शिवसेना ने कहा कि श्रीलंका ने लिट्टे समस्या खत्म की और दुनिया ने उसकी तारीफ की। इसी तरह अमेरिका ने पाकिस्तान में घुसकर ओसामा बिन लादेन को मार गिराया और दुनिया ने उसके साहस की सराहना की।

हम कुछ भी नहीं करने के बाद भी अपनी पीठ थपथपा रहे हैं
शिवसेना ने कहा कि, हम कुछ भी नहीं करने के बाद भी अपनी पीठ थपथपा रहे हैं। यह अमेरिका और फ्रांस जैसे देशों के लिए पुलवामा में आतंकी हमले की निंदा करना अलग बात है और कश्मीर को खुले तौर पर भारत का हिस्सा कहना अलग बात है। उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाली पार्टी ने कहा कि, पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान ने कहा कि यदि पुलवामा आतंकी हमले पर भारत कार्रवाई करता है तो उनका देश जवाबी कार्रवाई करेगा। जब तक अमेरिका और फ्रांस जैसे देश पाकिस्तान को यह नहीं बताएंगे कि वह हारेगा (भारत के साथ संघर्ष के मामले में) तबतक इस तरह के देशों को भारत का सच्चा दोस्त नहीं माना जा सकता है।












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