Shimla Agreement PDF: क्या है शिमला समझौता? कहां पढ़ें 2 जुलाई 1972 का ऐतिहासिक दस्तावेज
Shimla Agreement PDF: जम्मू-कश्मी के पहलगाम में हुए आतंकी हमले के बाद भारत ने पाकिस्तान के खिलाफ कड़ा रुख अपनाते हुए सिंधु जल समझौते को स्थगित कर दिया है। भारत ने कुल 5 कड़े फैसले हुए, जिसमें पाकिस्तानी नागरिकों को वीजा जारी करना भी बंद कर दिया है। भारत के इन कदमों से पाकिस्तान बौखला गया है।
वहीं पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शाहनवाज शरीफ की अध्यक्षता में गुरुवार को पाकिस्तान की राष्ट्रीय सुरक्षा समिति की बैठक हुई, जिसमें पाकिस्तान ने शिमला समझौते को रद्द करने की धमकी दी है। लेकिन आखिर क्या है शिमला समझौता? इसे आप कहां पढ़ सकते हैं?

अब क्यों चर्चा में है यह समझौता?
भारत की सख्त प्रतिक्रिया के जवाब में पाकिस्तान ने शिमला समझौते को रद्द करने की धमकी दी है, साथ ही वाघा बॉर्डर और एयरस्पेस भी बंद कर दिया है। यह कदम पाकिस्तान की निराशा और अंतरराष्ट्रीय मंच पर अलग-थलग पड़ने की स्थिति को दर्शाता है।
Shimla Agreement-शिमला समझौता: कैसे बना, क्या था इसका मकसद?
साल 1971 में भारत और पाकिस्तान के बीच युद्ध हुआ था, जिसमें भारत की निर्णायक जीत हुई और पूर्वी पाकिस्तान दुनिया के नक्शे से मिटकर बांग्लादेश बन गया। इस युद्ध में पाकिस्तान के 90 हजार सैनिकों को भारत ने युद्धबंदी बनाया और करीब 5,000 वर्ग मील क्षेत्र पर कब्जा कर लिया।
इस युद्ध के 16 महीने बाद, को भारत की प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी और पाकिस्तान के तत्कालीन प्रधानमंत्री जुल्फिकार अली भुट्टो के बीच शिमला में एक ऐतिहासिक समझौता हुआ, जिसे 'शिमला समझौता' कहा जाता है।
Shimla Agreement: शिमला समझौते में क्या-क्या शामिल था?
आपसी बातचीत से समाधान: भारत और पाकिस्तान ने तय किया कि वे अपने सभी विवाद आपसी बातचीत और शांतिपूर्ण तरीकों से सुलझाएंगे। इसमें किसी तीसरे पक्ष की कोई भूमिका नहीं होगी।
नियंत्रण रेखा का सम्मान: कश्मीर में नियंत्रण रेखा को दोनों देश स्वीकार करेंगे और कोई भी इसे एकतरफा नहीं बदलेगा।
शांति और सद्भावना की शपथ: दोनों देश एक-दूसरे के खिलाफ युद्ध, हिंसा या गलत प्रचार नहीं करेंगे। आपसी संबंधों को बेहतर करने का संकल्प लिया गया।
युद्धबंदियों की रिहाई और जमीन लौटाना: भारत ने पाकिस्तानी युद्धबंदियों को रिहा कर दिया और कब्जे में ली गई जमीन वापस की। पाकिस्तान ने भी कुछ भारतीय सैनिकों को रिहा किया।
कश्मीर मुद्दे को द्विपक्षीय रखा गया: भारत की इस समझौते में प्रमुख जीत यह रही कि कश्मीर मसले को अंतरराष्ट्रीय मंच से दूर रखते हुए द्विपक्षीय बना दिया गया।
यहां क्लिक करें पढ़ें- शिमला समझौते का दस्तावेज
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