शीला दीक्षित की राजनीतिक वापसी से कांग्रेस में पड़ेगी फूट
नई दिल्ली (विवेक शुक्ला)। केरल से अपना बोरिया-बिस्तरा लेकर वापस दिल्ली आ गई शीला दीक्षित के दिल्ली की सियासत में लौटने पर भाजपा और आम आदमी पार्टी की तरफ से तो कोई खास प्रतिक्रिया नहीं आई है, पर उनकी अपनी पार्टी में उनके खिलाफ माहौल बनना शुरू हो गया। हालांकि कहने वाले यह भी दावा कर रहे हैं कि शीला दीक्षित अब सियासत की मारा-मारी से दूर रहेंगी।

शीला के खिलाफ आवाज बुलंद करने वाले अभी सही वक्त का इंतजार कर रहे हैं,जब ये उन पर करारा वार करेंगे। इनका नेतृत्व कर रहे हैं पूर्व सांसद जय प्रकाश अग्रवाल। अग्रवाल जब दिल्ली कांग्रेस के चीफ थे, तब उनके शीला दीक्षित से छत्तीस का आंकड़ा रहा। दोनों के बीच के कटु संबंधों को बेहतर बनाने के लिए आला कमान ने भी कई बार नाकाम कोशिशें की। हालांकि कोई बहुत लाभ नहीं हुआ।
जानकारों ने बताया कि अग्रवाल गुट के कांग्रेसी कह रहे हैं कि शीला को अब प्रदेश की राजनीति में कोई अहम जिम्मेदारी नहीं मिलनी चाहिए क्योंकि उऩके नेतृत्व में रहते ही कांग्रेस का धूल में मिलना शुरू हुआ विधान सभा चुनाव से।
हालांकि कांग्रेस का एक धड़ा चाहता है कि शीला को दिल्ली की राजनीति में लौटना चाहिए। क्योंकि अब यहां के लोगों को समझ आ गया है कि उनके नेतृत्व में दिल्ली में बेहतरीन काम किया। यहां की जनता उन्हें वापस देखना चाहती है।
सनद रहे कि शीला दीक्षित 15 साल तक दिल्ली की मुख्यमंत्री रहीं लेकिन पिछले साल हुए विधानसभा चुनाव में पार्टी को करारी हार का सामना करना पड़ा। इसके बाद उन्हें केरल का राज्यपाल नियुक्त किया गया था। इस साल मई में केंद्र में एनडीए की सरकार बनने के बाद यूपीए सरकार के दौरान नियुक्त कई राज्यपाल अपना पद छोड़ चुके हैं।
इससे पहले शीला दीक्षित ने कहा है कि इस्तीफ़ा स्वीकार होने के बाद ही वो अपने राजनीतिक भविष्य के बारे में फ़ैसला करेंगी। वैसे खहने वाले यह भी कह रहे हैं कि शीला दीक्षित फिर से राजनीति में वापसी नहीं करेंगी। अब वह रिलेक्स करना चाहती हैं।












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