केजरीवाल के मुकाबले केवल महिलाएं ही क्यों, क्या किसी मर्द में नहीं दम?
बैंगलुरू। 7 फरवरी को दिल्ली विधानसभा चुनाव का बिगुल बज चुका है इसलिए अब सारी राजनैतिक पार्टियों ने मसलन कांग्रेस, बीजेपी और आम आदमी पार्टी ने चुनाव के लिए कमर कस ली है। एग्जिट पोल बता रहे हैं कि दिल्ली में भगवा तो खिलेगा लेकिन केजरीवाल को हराना भाजपा और कांग्रेस के लिए आसान नहीं होगा इसलिए अभी तक वो चेहरा सामने नहीं आया है कि केजरीवाल के खिलाफ कांग्रेस या बीजेपी के टिकट पर लड़ेगा।

अफवाहों का बाजार गर्म है, पिछले दिल्ली चुनाव में शीला दीक्षित को हराकर लोगों के दिलों के राजा बने अरविंद केजरीवाल के खिलाफ लड़ने के लिए जितने भी नाम आये हैं वो सब के सब महिलाओं के ही है। आपको जानकर ताज्जुब होगा कि कांग्रेस हो या बीजेपी दोनों ही पार्टियों की ओर से केजरीवाल के खिलाफ लड़वाने के लिए अभी तक किसी भी मेल का नाम नहीं लिया गया है।
जहा बीजेपी की ओर से किरण बेदी, शाजिया इल्मी और जया प्रदा को केजरीवाल के खिलाफ लड़वाने के चर्चे हैं वहीं दूसरी ओर कांग्रेस की ओर से दिल्ली विश्वविद्यालय चुनावों का बड़ा नाम किरण वालिया को खड़ा करने की बातें हो रही है। तो क्या हालात ऐसे बन गये हैं कि किसी भी पुरूष के अंदर केजरीवाल के खिलाफ लड़ने का दम नहीं है?
गौरतलब है कि कांग्रेस अजय माकन की अगुवाई में दिल्ली विधानसभा चुनाव लड़ने जा रही है लेकिन कांग्रेस के प्रबल चेहरा कहे जाने वाले अजय माकन को सदर बाजार से टिकट दिया गया है ना कि नई दिल्ली सीट से जहां से केजरीवाल ने पिछले चुनाव में दिल्ली में लगातार तीन बार मुख्यमंत्री रह चुकीं शीला दीक्षित को बड़े अंतर से हराया था।
हालांकि शीला दीक्षित ने अजय माकन की तारीफ करते हुए कहा था कि अजय माकन ही केजरीवाल को कड़ी टक्कर दे सकते हैं क्योंकि वो युवा और लोकप्रिय चेहरा है लेकिन बावजूद माकन को वहां से टिकट नहीं दिया गया जहां से केजरीवाल चुनाव लड़ने जा रहे हैं तो वहीं बीजेपी अभी तक तय नहीं कर पायी है कि केजरीवाल के मुकाबले वो किसे खड़ा करे तो क्या सच में यह मान लिया जाये कि बीजेपी और कांग्रेस दोनों में ही कोई मर्द ऐसा नहीं जो केजरीवाल को टक्कर दे सके?
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