Shashi Tharoor का दावा, कई निर्वाचकों को मेरे खिलाफ वोट करने का मिला निर्देश

कांग्रेस अध्यक्ष पद के चुनाव की रेस में पार्टी के दो वरिष्ठ नेता मल्लिकार्जुन खड़गे और शशि थरूर (Shashi Tharoor) हैं। दोनों नेताओं के बीच पार्टी के अगले अध्यक्ष पद को लेकर रस्साकस्सी चल रही है। हालांकि पार्टी के भीतर एक धड़ा ऐसा है जो यह मानता है कि चुनाव में मल्लिकार्जुन खड़गे की जीत होगी। इस तरह की भी रिपोर्ट सामने आई कि मल्लिकार्जुन खड़गे पार्टी के आधिकारिक उम्मीदवार हैं और वह गांधी परिवार की भी पसंद हैं। हालांकि इन रिपोर्ट से कांग्रेस पार्टी ने इनकार करते हुए कहा कि यह चुनाव निष्पक्ष और पारदर्शी है।

shashi tharoor

वहीं शशि थरूर ने चुनाव के बीच एक ऐसा बयान दिया है जिसको लेकर चर्चा तेज हो गई है। शशि थरूर ने दावा किया है कि कई निर्वाचको को उनके नेता ने निर्देश दिया है कि वह मेरे प्रतिद्वंदी को अपना वोट दें। लेकिन मुझे भरोसा है कि अंत में गुप्त मतदान के दौरान यह लोग मुझे अपना वोट देंगे। दिलचस्प बात यह है कि एक तरफ जहां मल्लिकार्जुन खड़गे के नामांकन में पार्टी के कई वरिष्ठ नेता शामिल हुए तो शशि थरूर के नामांकन के दौरान ऐसा नहीं दिखा। नामांकन के दौरान की तस्वीर सामने आने के बाद से ही इस तरह के कयास लगाए जा रहे हैं कि मल्लिकार्जुन खड़गे को पार्टी के वरिष्ठ नेताओं का समर्थन प्राप्त है।

शशि थरूर ने कहा कि मुझे अपेक्षा है कि चुनाव समिति इस बात को स्पष्ट करेगी कि मतदान गुप्त वोट के जरिए होगा और बॉक्स को दिल्ली में खोला जाएगा। वोटों की गिनती से पहले उसे आपस में मिला दिया जाएगा। साथ ही थरूर ने कहा कि गांधी परिवार ने पहले ही यह स्पष्ट कर दिया है कि वह इस चुनाव से दूर हैं और वह इसमे किसी भी तरह से हिस्सा नहीं लेंगे।

अध्यक्ष पद की रेस में शामिल दोनों ही प्रतिद्वंदी अपने निर्वाचकों को लुभाने की कोशिश कर रहे हैं और उनसे वोट अपील कर रहे हैं। दोनों ही प्रतिद्वंदी अपने प्रतिनिधियों की ओर से निर्वाचकों तक पहुंच रहे हैं, उन्हें फोन करके वोट अपील कर रहे हैं। मल्लिकार्जुन खड़गे और शशि थरूर दोनों ही कई राज्य का दौरा कर चुके हैं और निर्वाचकों से मुलाकात कर रहे हैं ताकि वह उनका समर्थन हासिल कर सके। मल्लिकार्जुन खड़गे अभी तक 8 राज्यों के पार्टी मुख्यालय पहुंच चुके हैं जबकि शशि थरूर चार राज्यों तक पहुंचे हैं।

बता दें कि 9 अक्टूबर को मल्लिकार्जुन खड़गे ने पंजाब पार्टी के मुख्यालय में अपना भाषण दिया था। इसमे अल्का लांबा भी शामिल हुई थीं। उन्होंने कहा कि यह चुनाव दर्शाता है कि पार्टी के भीतर आंतरिक लोकतंत्र है। खड़गे जी की ही तरह मैं शशि थरूर जी की बैठक में भी शामिल होना चाहूंगी। हमे किसी भी बात का कोई डर नहीं है। 2000 में हुए चुनाव का उदाहरण देते हुए लांबा ने कहा कि हालांकि जितेंद्र प्रसाद सोनिया गांधी से चुनाव हार गए थे, बावजूद इसके उन्हें और उनके समर्थकों को नजरअंदाज नहीं किया गया था। उस चुनाव में सोनिया गांधी को 7542 वोट मिले थे, जबकि जितेंद्र प्रसाद 94 वोट मिले थे।

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