दिल्ली में कांग्रेस-AAP में तालमेल को लेकर शरद पवार का बड़ा दावा, बताया कितनी सीटें देने को राजी हैं केजरीवाल
एनसीपी सुप्रीमो शरद पवार ने अगले साल होने वाले लोकसभा चुनावों को लेकर दिल्ली में कांग्रेस और आम आदमी पार्टी के बीच सीटों के तालमेल के बारे में एक बड़ा दावा किया है। पवार ने कहा है कि दिल्ली के सीएम अरविंद केजरीवाल कांग्रेस के लिए राजधानी की 7 में से 3 लोकसभा सीटें छोड़ने के लिए तैयार हैं।
एनसीपी संस्थापक पवार ने इंडिया टुडे मुंबई कॉन्क्लेव 2023 में यह दावा किया है। उनके मुताबिक दिल्ली के मुख्यमंत्री और आम आदमी पार्टी के संयोजक अरविंद केजरीवाल ने हाल ही में एक चर्चा के दौरान उनसे कहा था कि वे कांग्रेस को दिल्ली की 7 लोकसभा सीटों में से 3 सीटें देने के लिए तैयार हैं।

दिल्ली में कांग्रेस को 3 सीटें देने के लिए केजरीवाल तैयार- पवार
पवार ने कहा है, 'मेरी अरविंद केजरीवाल के साथ दिल्ली की सीटों को लेकर एक बार बातचीत हुई थी। आज की तारीख में कांग्रेस के पास दिल्ली में शून्य सीटें हैं। केजरीवाल ने मुझसे कांग्रेस के साथ बात करने का आग्रह किया था कि 7 में से वे (केजरीवाल) उसे (कांग्रेस को) 3 सीटें देने और मुद्दे को सुलझाने के लिए तैयार हैं।'
दो बार से दिल्ली की सातों सीटें जीत रही है बीजेपी
दिल्ली में 2014 और 2019 दोनों लोकसभा चुनावों में सभी सातों सीटें बीजेपी ने जीती थी। पवार ने यह दावा विपक्ष के विभिन्न नेताओं के खिलाफ प्रवर्तन निदेशालय की कार्रवाई पर चर्चा के दौरान की है। इसमें सबसे नया नाम आम आदमी पार्टी सांसद संजय सिंह का जुड़ा है, जिन्हें बुधवार को पूरे दिन की कार्रवाई के बाद शाम में ईडी ने गिरफ्तार कर लिया है।
एनसीपी नेता ने यह भी दावा किया है कि केंद्रीय एजेंसियों की इस तरह की कार्रवाई से विपक्षी दलों को 2024 के लोकसभा चुनावों में भाजपा के खिलाफ एकजुट होने का मौका मिलेगा। जब शरद पवार से यह सवाल किया गया कि क्या मोदी सरकार के डर से इंडिया ब्लॉक की सहयोगी पार्टियां एक साथ आ रही हैं, तो वे बोले, 'राजनीति और लोकतंत्र में कोई भी नहीं कह सकता कि कोई पार्टी खत्म हो गई है। कोई हार सकती है, लेकिन फिर से जीवित भी हो सकती है। हम बहुत सारे दलों को देख चुके हैं, जो कि चुनाव हार गए और अगली बार वे फिर से पुनर्जीवित हो गए। '
दिल्ली में आम आदमी पार्टी से समझौते को लेकर कांग्रेस की प्रदेश यूनिट जिस तरह से आनाकानी करती नजर आई है, उसमें पवार का यह दावा बहुत महत्वपूर्ण है। क्योंकि, पिछले लोकसभा चुनावों में सात में से पांच सीटों पर दूसरे नंबर पर रहने वाली कांग्रेस इस प्रस्ताव को मानने के लिए किस हद तक तैयार होती है, यह बड़ा सवाल है।












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