शरद पवार गुट को मिल गया नया नाम, 'असली एनसीपी' अजित पवार को देने के बाद चुनाव आयोग का फैसला
चुनाव आयोग के आदेश के अनुसार शरद पवार गुट ने बुधवार को अपनी नई पार्टी के लिए तीन नए नाम और चुनाव निशानों का सुझाव जमा करवा दिया था। जिसपर चुनाव आयोग ने फैसला ले लिया है। आयोग ने उन्हें शाम चार बजे तक इसके लिए 'एक बार का विकल्प' दिया था।
मंगलवार को ही चुनाव आयोग ने शरद पवार के भतीजे और महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री अजित पवार गुट की पार्टी को असली एनसीपी माना था और उसी को पार्टी का असली चुनाव चिन्ह 'घड़ी' भी भी दे दिया था।

'राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी- शरदचंद्र पवार'
चुनाव आयोग ने शरद पवार गुट के लिए जिस नए नाम पर मुहर लगाया है, वह है- 'राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी- शरदचंद्र पवार'। वनइंडिया ने पहले ही रिपोर्ट दी थी कि शरद गुट ऐसे नाम का विकल्प सुझाने जा रहा है, जिसमें पूर्ववर्ती पार्टी का नाम भी शामिल हो।
एनसीपी और घड़ी निशान पर आयोग ने माना अजित पवार गुट का दावा
इससे पहले मंगलवार को चुनाव आयोग ने एनसीपी नाम और घड़ी चुनाव निशान पर अजित पवार गुट का दावा माना था। साथ ही 27 फरवरी को होने वाले राज्यसभा चुनाव को देखते हुए शरद पवार गुट से बुधवार शाम 4 बजे तक तीन नामों और तीनों चुनाव निशान वाले विकल्प जमा करने का 'एक बार का विकल्प' दिया था।
एनसीपी की विधायी इकाई का बहुमत अजित पवार के पक्ष में
चुनाव आयोग ने अपने फैसले में एनसीपी की विधायी इकाई में बहुमत को आधार माना है। चुनाव आयोग के आदेश के अनुसार एनसीपी के कुल 81 सांसदों, एमएलए, एमएलसी में से 57 ने अजित पवार का समर्थन किया। जबकि, सिर्फ 28 ही शरद पवार के साथ खड़े रहे।
हालांकि, 5 एमएलए और एक लोकसभा सांसद ऐसे भी निकले, जिन्होंने दोनों गुटों के समर्थन में हलफनामा दाखिल किया। चुनाव आयोग ने कहा कि अगर इन 6 को हटा भी दिया जाए तो भी अजित पवार के गुट के पास पार्टी के सांसदों,विधायकों और विधान पार्षदों का बहुमत है।
पिछले साल अजित पवार पार्टी के अधिकांश विधायकों और सांसदों के लेकर अलग हो गए थे और खुद के गुट को असली बताते हुए महाराष्ट्र की बीजेपी-शिवसेना सरकार में शामिल हो गए थे। अभी इस सरकार में उपमुख्यमंत्री हैं, जबकि शरद पवार का गुट विपक्षी गठबंधन में शामिल है।












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