SHANTI BILL 2025: दोनों सदनों से पास हुआ शांति बिल, फुल फॉर्म से लेकर प्रावधानों तक हर सवाल का जवाब जानें
SHANTI BILL 2025: संसद के शीतकालीन सत्र में एसआईआर (SIR), दिल्ली में प्रदूषण समेत तमाम मुद्दों पर जमकर हंगामा हुआ। विपक्ष के हंगामे के बीच कई बार सदन की कार्यवाही भी बाधित होती रही। हालांकि, आखिरी सप्ताह में सरकार कई अहम बिलों पर चर्चा करने और उन्हें पास कराने में सफल रही है। परमाणु ऊर्जा संशोधन विधेयक (SHANTI Bill) को दोनों सदन से मंजूरी मिल चुकी है। विपक्षी दलों ने बिल के प्रावधानों पर तीखा विरोध दर्ज कराया था।
सरकार ने इस बिल के पक्ष में तर्क दिया कि यह देश के विकास और ऊर्जा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता के लिहाज से महत्वपूर्ण कानून साबित होगा। ऐसे में यह जानना जरूरी हो जाता है कि SHANTI बिला का फुल फॉर्म क्या है और सरकार इसे क्यों लेकर आई है?

संसद से पास हुए SHANTI Bill का पूरा नाम क्या है?
शांति बिल का पूरा नाम सस्टेनेबल हार्नेसिंग एंड एडवांसमेंट ऑफ न्यूक्लियर एनर्जी फॉर ट्रांसफॉर्मिंग इंडिया (Sustainable Harnessing and Advancement of Nuclear Energy for Transforming India) है। इसी शॉर्ट फॉर्म के कारण इसे SHANTI बिल नाम दिया गया है।
SHANTI बिल को लेकर सरकार ने दिए ये तर्क
- अब तक इस क्षेत्र में सरकार का लगभग पूरा नियंत्रण रहा है, लेकिन SHANTI बिल के जरिए निजी कंपनियों के लिए भी रास्ता खोला जा रहा है। आने वाले समय में परमाणु ऊर्जा क्षेत्र में प्राइवेट प्लेयर्स की एंट्री संभव होगी।
- सरकार ने बिल के समर्थन में तर्क दिया कि इससे निवेश बढ़ेगा, नई तकनीक आएगी और स्वच्छ ऊर्जा को बढ़ावा मिलेगा।
PM Modi ने इसे भारत के विकास के लिए बताया ऐतिहासिक
बिल पास होने के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा कि यह देश के टेक्नोलॉजी और एनर्जी सेक्टर के लिए एक ऐतिहासिक कदम है। उन्होंने कहा कि यह कानून सुरक्षित तरीके से AI को ताकत देने, ग्रीन मैन्युफैक्चरिंग को बढ़ावा देने और स्वच्छ ऊर्जा आधारित भविष्य की नींव रखने में मदद करेगा।
SHANTI Bill के विरोध में विपक्ष ने दिए ये तर्क
- शांति बिल का विरोध कांग्रेस, टीएमसी, डीएमके, समाजवादी पार्टी समेत कई अन्य विपक्षी पार्टियों ने किया था।
- बिल के विरोध में विपक्षी सांसदों का तर्क है कि यह देश के नागरिकों की सुरक्षा के साथ खिलवाड़ है। परमाणु ऊर्जा के क्षेत्र में प्राइवेट कंपनियों को शामिल करने पर भारत के हितों के साथ समझौता हो सकता है।
- डीएमके सांसद कनिमोई ने कहा कि परमाणु ऊर्जा जैसे संवेदनशील क्षेत्रों को निजी कंपनियों के फायदे के लिए खोलना देश के भविष्य और सुरक्षा के साथ समझौता करना है।
SHANTI Bill के कानून बनते ही बदलेंगे दो पुराने कानून
शांति बिल दोनों सदनों से पारित हो चुका है और राषट्रपति की मंजूरी के बाद यह कानून का रूप ले लेगा। इसके कानून बनते ही परमाणु ऊर्जा अधिनियम, 1962 और नागरिक दायित्व अधिनियम, 2010 निरस्त हो जाएंगे। सरकार का तर्क है कि ये दोनों कानून अब समय के साथ अप्रासंगिक हो चुके थे और निजी निवेश को रोकने में बड़ी बाधा बने हुए थे। SHANTI बिल के जरिए इन्हीं रुकावटों को दूर करने की कोशिश की गई है।
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