बुरहान वानी के स्कूल की शाहिरा जम्मू कश्मीर बोर्ड की टॉपर, 500 में से मिले 498 नंबर
बुरहान वानी के स्कूल में पढ़ने वाली शाहिरा अख्तर कश्मीर बोर्ड एग्जाम में 500 में 498 नंबर हासिल कर बनीं टॉपर। पुलवामा के त्राल की रहने वाली हैं शाहिरा अख्तर।
श्रीनगर। आठ जुलाई को हिजबुल मुजाहिद्दीन कमांडर बुरहान वानी की मौत के बाद से पूरी कश्मीर घाटी 100 दिनों तक कर्फ्यू और दंगे की आग में जलती रही। स्कूल भी बंद हो गए और कई बच्चों का भविष्य अंधेरे में डूब गया। लेकिन इस अंधेरे में एक रोशनी बनीं पुलवामा की शाहिरा अख्तर और आज पूरे देश में यह रोशनी फैल चुकी है।

दंगों और हिंसा की वजह से बंद स्कूल
शाहिरा 17 वर्ष की वह लड़की है जिसने कश्मीर की बोर्ड परीक्षाओं में टॉप किया है। शाहिरा ने 500 में से 498 नंबर हासिल किए हैं। आप यह जानकर हैरान रह जाएंगे कि शाहिर साउथ कश्मीर के उसी त्राल से हैं जहां का बुरहान वानी था और उसी स्कूल में पढ़ती हैं जिसमें वानी पढ़ता था। दिलचस्प बात है कि जहां एक छात्र ने स्कूल को एक नई ऊंचाईयां दे दीं तो एक छात्र ने स्कूल के नाम पर नकारात्मक असर डाला था। कश्मीर बोर्ड परीक्षा का नतीजा सोमवार को आया है। बोर्ड परीक्षाएं भी इस बार कश्मीर में सुरक्षा के सख्त पहरे में हुई हैं। श्रीनगर से 40 किलोमीटर दूर डाडसर गांव की रहने वाली शाहिरा सरकारी गर्ल्स हायर सेकेंडरी स्कूल में पढ़ती हैं। उन्होंने एक ऐसा अध्याय लिख डाला है जो आने वाले कई समय तक लोगों को याद रहेगा। दंगों की वजह से शाहिरा को घर पर ही रहना पड़ा और उनकी कोचिंग भी बंद हो गई। उन्होंने बताया कि 27 जुलाई से ही वह कोचिंग नहीं जा पाईं और अगस्त में उनके दादाजी का निधन हो गया। उन्हें इस बात की काफी चिंता थी कि उनका गणित का सेलेबस 60 प्रतिशत भी पूरा नहीं था। सड़कों पर विरोध प्रदर्शन और मार्च हो रहे थे। इसके बाद शाहिरा गांव के लोकल कम्यूनिटी लेवल के कोचिंग सेंटर गईं और उन्होंने अपना सेलेबस पूरा किया। बोर्ड टॉपर शाहिरा अब नीट यानी नेशनल इलीजिबिलिटी कम एंट्रेंस टेस्ट देना चाहती हैं।
करना पड़ता था घंटों इंतजार
शाहिरा का परिवार भी उनकी सफलता से काफी खुश है। शाहिरा अपनी सफलता का श्रेय खुदा, परिवार और अपने टीचर्स को देती हैं। वह बताती हैं जब कभी भी वह परेशान होती थीं तो अपने टीचर्स के पास जाती थीं। लेकिन टीचर्स के पास जाने के लिए उन्हें घंटों इंतजार करना पड़ता था ताकि वह सड़कों पर जारी विरोध प्रदर्शन और मार्च के दौरान होने वाली हिंसा से बच सकें। शाहिरा के पिता कहते हैं उन्होंने हमेशा अपनी बेटी को पढ़ाई पर ध्यान देने की सलाह दी। उन्होंने बताया कि शाहिरा वक्त की पाबंद हैं। उनके पिता चाहते हैं कि शाहिरा भविष्य में हमेशा ऐसे ही नई ऊंचाईयों को छूती रहे। कश्मीर बोर्ड के 53,159 बच्चों ने इस बार परीक्षा में हिस्सा लिया। इसमें से 40,119 छात्र पास हुए हैं। परीक्षा में 76.08 लड़कियां पास हुई हैं तो वहीं 74.95 लड़के पास हुए हैं। वर्ष 2015 में जब स्थितियां सामान्य थीं पास होने वाले छात्रों का प्रतिशत सिर्फ 55.18 था।
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