छात्रों ने यूनिवर्सिटी के सामने पकाकर खाया बीफ, पशुओं की खरीद पर बैन का किया विरोध
सीपीआई के जनरल सेक्रेटरी सीतारा येचुरी ने कहा कि अगर किसान बूढ़े पशु बेच नहीं पाएंगे तो फिर वो जवान पशु कैसे खरीदेंगे, ये उन पर एक भार हो जाएंगे.
त्रिवेंद्रम। केंद्र सरकार के वध के लिए पशु बाजारों में मवेशियों की खरीद-फरोख्त पर प्रतिबंध लगाने के कानून के खिलाफ केरल में भारी प्रदर्शन देखने को मिल रहा है। वामपंथी छात्र संगठन स्टूडेंट फेडरेशन ऑफ इंडिया (एसएफआई) ने इस कानून के विरोध में शनिवार को त्रिवेंद्रम में विश्वविद्यालयों और कॉलेजों के सामने बीफ पकाकर खाया।

केरल में जगह-जगह इस कानून को लेकर प्रदर्शन किए गए। कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ इंडिया (एम) भी इस मामले पर तीखा विरोध जता रही है। पार्टी का कहना है कि ये कानून ना सिर्फ ये लोगों की खाने-पीने की आजादी में हस्तक्षेप है बल्कि ये एक बड़े वर्ग के कारोबार पर भी बुरा असर डालेगा। सीपीआई के जनरल सेक्रेटरी सीतारा येचुरी ने कहा कि अगर किसान बूढ़े पशु बेच नहीं पाएंगे तो फिर वो जवान पशु कैसे खरीदेंगे, ये उन पर एक भार हो जाएंगे, जो उनकी माली हालत को प्रभावित करेगा। ऐसे में किसानों के लिए ये काला कानून है।
क्या है पशुओं के लेकर नया कानून
केंद्र सरकार ने एक नए कानून के जरिए काटने के लिए पशु बाजारों में मवेशियों की खरीद-फरोख्त पर प्रतिबंध लगा दिया है। पर्यावरण मंत्रालय ने पशु क्रूरता निरोधक अधिनियम के तहत सख्त पशु क्रूरता निरोधक (पशुधन बाजार नियमन) नियम, 2017 को अधिसूचित किया है।
अधिसूचना के मुताबिक, पशु बाजार समिति के सदस्य सचिव को यह सुनिश्चित करना होगा कि कोई भी शख्स बाजार में अवयस्क पशु को बिक्री के लिए न लेकर आए। किसी भी शख्स को पशु बाजार में मवेशी को लाने की इजाजत नहीं होगी, जबतक कि वहां पहुंचने पर वह पशु के मालिक द्वारा हस्ताक्षरित यह लिखित घोषणा-पत्र न दे दे, जिसमें मवेशी के मालिक का नाम और पता हो और फोटो पहचान-पत्र की एक प्रति भी लगी हो। यह भी स्पष्ट करना होगा कि मवेशी को काटने के लिए नहीं बेचा जा रहा है।












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