18 वर्ष के बाद घर पहुंचेगा सिपाही गया प्रसाद का शव
नई दिल्ली। 18 वर्षों से भारतीय सेना के सिपाही गया प्रसाद के घर में रहने वाले हर व्यक्ति की आंखों में जो इंतजार था उसे एक खबर ने आंसूओं में बदलकर रख दिया। भारतीय सेना में आपको कई जांबाजों की कहानियां सुनने को मिलेंगी और गया प्रसाद भी अब उसी कहानी का हिस्सा हो गए हैं।

दिसंबर 1996 में सियाचिन ग्लेशियर में आए एक हिमस्खलन में गया प्रसाद गायब हो गए थे। उन्हें उसी समय मृत घोषित कर दिया गया था लेकिन उनका शव नहीं मिल सका था। अब इस हफ्ते के अंत में उनका शव उनके घर पहुंच जाएगा।
भारतीय सेना ने दी जानकारी
उत्तर प्रदेश के मैनपुरी जिले के कुदारिया गांव में गया प्रसाद का परिवार रहता है। उनके पिता गजाधर सिंह की उम्र इस समय 90 वर्ष है और उन्हें इस बात की संतुष्टि है कि कम से कम अब अपने बेटे का चेहर वह अपनी मृत्यु से पहले देख सकेंगे। उन्होंने बताया कि करीब एक हफ्ते पहले उनके पास जानकारी आई कि सेना को गया प्रसाद का शव मिल गया है।
गजाधर सिंह खुद भी भारतीय सेना में सूबेदार के पद पर रह चुके हैं। गया प्रसाद को याद भी नहीं है कि कब उनका बेटा आखिरी बार छुट्टियों पर गांव आया था। गया प्रसाद का शव उनके घर नहीं पहुंचा था लेकिन उनके परिवार वालों ने पूरे रीति-रिवाज के साथ उनका अंतिम संस्कार कर दिया था।
क्या था हादसा
गया प्रसाद सियाचिन ग्लेशियर की शाइला पोस्ट पर पोस्टेड थे। दिसंबर 1996 में वह 10 जवानों की एक टीम के साथ रूटीन पेट्रोलिंग पर थे जिस समय वह यहां पर हिमस्खलन में फंस गए थे। गया प्रसाद के साथ जितने भी जवान गए थे, वह बच गए लेकिन गया प्रसाद हादसे का शिकार हो गए।
कई हफ्तों तक रेस्क्यू ऑपरेशन चलाया गया लेकिन उनका शव नहीं मिल पाया। सेना की ओर से जो चिट्ठी गया प्रसाद के परिवार वालों को भेजी गई है उसमें बताया गया है कि एक बटालियन रूटीन चेक पर थी जिस समय उसे गया प्रसाद का शव दिखाई दिया।
राजपूताना राइफल्स के गया प्रसाद के शव का जब निरीक्षण गया तो उनके टैग और सर्विस नंबर से पता लगा कि यह सिपाही का शव है।












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