'चंद्रयान-3 की सफलता पर भरोसा लेकिन लैंडिंग से 30KM की दूरी चुनौतीपूर्ण', खगोलशास्त्री ने कही अहम बात
Chandrayaan-3 Mission: भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) ने रविवार (20 अगस्त) को जानकारी दी है कि चंद्रयान-3 अपनी रफ्तार से आगे बढ़ रहा है और 23 अगस्त को चंद्रमा की सतह पर सॉफ्ट-लैंडिंग करेगा। इसरो ने कहा है कि 23 अगस्त को भारतीय समयानुसार शाम 6:04 बजे के आसपास चांद पर लैडिंग होने की उम्मीद है।
चंद्रयान-3 चंद्रमा पर सफल लैंडिंग के अलावा, चंद्रयान-3 ग्रहीय अभियानों और अंतरिक्ष के रहस्यों की भी जानकारी देगा। इस मिशन को वरिष्ठ खगोलशास्त्री और इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ एस्ट्रोफिजिक्स (IIA) बेंगलुरु की निदेशक प्रोफेसर लेकर अन्नपूर्णी सुब्रमण्यम ने कहा कि चंद्रमा मिशन भारत की अंतरिक्ष यात्रा में एक महत्वपूर्ण क्षण है।

एक मीडिया संस्थान से बात करते हुए वरिष्ठ खगोलशास्त्री अन्नपूर्णी सुब्रमण्यम ने कहा कि चंद्रयान-3 की सफलता पर उनको पूरा भरोसा है। लेकिन लैंडिंग से 30 किलोमीटर पहले की दूरी अभी भी चुनौतीपूर्ण बनी हुई है।
अन्नपूर्णी सुब्रमण्यम ने कहा, 'प्रक्षेपण से लेकर चंद्रमा की कक्षा में पहुंचने तक इसरो ने कई अभ्यास किए हैं। चंद्रमा के गुरुत्वाकर्षण की पकड़ में आना महत्वपूर्ण था और हमने वह हासिल भी किया है। चंद्रयान-3 के मिशन ने कई महत्वपूर्ण चरण पार कर लिए हैं। अब, लैंडर को थोड़ी निचली कक्षा में डी-बूस्ट करना होगा। यह एक और छोटा लेकिन महत्वपूर्ण कदम है और हम इसे निश्चित रूप से कर सकते हैं। हम बिना किसी परेशानी के वहां पहुंच जाएंगे।'
अन्नपूर्णी सुब्रमण्यम ने कहा, 'लेकिन यह आखिरी 30 किमी है जो काफी महत्वपूर्ण होगा। अंतरिक्ष के पैरामीटर विशाल हैं और इसमें जटिलताएं भी शामिल हैं। इसकी हमेशा एक छोटी सी गैर-शून्य संभावना रहेगी कि यह गलत हो सकता है और हम इसे खत्म नहीं कर सकते। लेकिन मुझे पूरा यकीन है कि हम इस बार ऐसा करेंगे। इसमें भारी मात्रा में तैयारी की गई है और चंद्रयान-3 के सफल होने की संभावना सबसे ज्यादा है।'












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