Seemanchal Union Territory: सीमांचल बनेगा केंद्र शासित प्रदेश? पप्पू यादव के ट्वीट पर गृह मंत्री ने क्या कहा
Seemanchal Union Territory Rumors: सोशल मीडिया पर इन दिनों बिहार के सीमांचल और पश्चिम बंगाल के कुछ जिलों को मिलाकर एक नया केंद्र शासित प्रदेश (UT) बनाने की खबर जंगल की आग की तरह फैली हुई है। दावों के अनुसार, रणनीतिक सुरक्षा के मद्देनजर सिलीगुड़ी कॉरिडोर के पास 'नॉर्थ ईस्ट गेटवे टेरिटरी' बनाने की तैयारी है।
इस खबर ने तब और तूल पकड़ लिया जब पूर्णिया सांसद पप्पू यादव ने इसे लेकर पोस्ट किया। हालांकि, अब केंद्र सरकार ने इन अटकलों पर पूर्ण विराम लगा दिया है। केंद्रीय गृह राज्यमंत्री नित्यानंद राय ने स्पष्ट किया है कि ऐसी कोई योजना नहीं है और ये दावे पूरी तरह निराधार एवं तथ्यहीन हैं।

'केंद्र शासित प्रदेश बनाने की योजना पूरी तरह तथ्य से परे है'
केंद्रीय गृह राज्यमंत्री नित्यानंद राय ने सोशल मीडिया पर पोस्ट करते हुए लिखा कि, 'बिहार और बंगाल के कुछ जिलों को मिलाकर केंद्र शासित प्रदेश बनाने की योजना पूरी तरह तथ्य से परे है और इसमें कोई सच्चाई नहीं है। मै यह बताना चाहता हूं कि पप्पू यादव के ट्वीट को कोई गंभीरता से ना ले।'
बिहार और बंगाल के कुछ जिलों को मिलाकर केंद्र शासित प्रदेश बनाने की योजना पूरी तरह तथ्य से परे है और इसमें कोई सच्चाई नहीं है। मै यह बताना चाहता हूं कि पप्पू यादव के ट्वीट को कोई गंभीरता से ना ले।@pappuyadavjapl
— Nityanand Rai (@nityanandraibjp) March 7, 2026
अफवाहों का बाजार और 'गेटवे टेरिटरी'
व्हाट्सएप और फेसबुक पर प्रसारित संदेशों में दावा किया जा रहा है कि देश की सुरक्षा को मजबूत करने के लिए सरकार बिहार-बंगाल के सीमावर्ती जिलों को केंद्र के सीधे नियंत्रण में लेना चाहती है। 'नॉर्थ ईस्ट गेटवे टेरिटरी' के नाम से वायरल इस खबर को लोग एक बड़े स्ट्रैटेजिक मास्टरस्ट्रोक के रूप में देख रहे थे। सिलीगुड़ी कॉरिडोर (चिकन नेक) की संवेदनशीलता के कारण कई लोग इस दावे पर आसानी से विश्वास कर बैठे, जिससे पूरे क्षेत्र में राजनीतिक हलचल मच गई।
सांसद पप्पू यादव का पोस्ट और विवाद
इस मामले ने राजनीतिक मोड़ तब लिया जब पूर्णिया के सांसद पप्पू यादव ने सोशल मीडिया पर इस मुद्दे को उठाया। उनके पोस्ट के बाद स्थानीय जनता और राजनीतिक गलियारों में डर और संशय का माहौल बन गया। विपक्ष और स्थानीय नेताओं ने इसे राज्यों की स्वायत्तता पर हमला बताना शुरू कर दिया। इस वायरल पोस्ट ने सरकार को रक्षात्मक मुद्रा में ला दिया, जिसके बाद गृह मंत्रालय की ओर से आधिकारिक स्पष्टीकरण की आवश्यकता महसूस की गई।












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