Sedition law: सरकार चाहती है......., लॉ कमीशन की रिपोर्ट पर बौखलाई कांग्रेस
Sedition law: लॉ कमीशन ने राजद्रोह कानून को बनाए रखने की सिफारिश की है तो कांग्रेस ने भाजपा सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। पार्टी ने सरकार पर इसको लेकर गंभीर आरोप लगाए हैं।

विधि आयोग की ओर से राजद्रोह कानून का समर्थन किए जाने पर कांग्रेस भड़क गई है। शुक्रवार को पार्टी ने बीजेपी सरकार पर आरोप लगाया है कि वह इसे और भी 'कठोर' बनाने की योजना तैयार कर रही है और आम चुनावों से पहले यह संदेश दे रही है कि इसका इस्तेमाल विपक्षी नेताओं के खिलाफ किया जाएगा।
बीजेपी पर असंतोष को दबाने के लिए इस्तेमाल करने का आरोप
कांग्रेस ने आरोप लगाया है कि बीजेपी राजद्रोह कानून का इस्तेमाल 'विध्वंसात्मक, कुचल देने और असंतोष को दबाने' के टूल के तौर पर करती है। विपक्षी पार्टी ने सरकार से यह भी सवाल किया है कि सर्वोच्च अदालत से इसे अनुचित बताए जाने और इसके खिलाफ सख्त टिप्पणियां करने के बावजूद इसे खत्म करने का साहस क्यों नहीं दिखाया है।
आम चुनावों से पहले विपक्ष को एकतरफा कार्रवाई का संदेश- कांग्रेस
कांग्रेस प्रवक्ता अभिषेक मनु सिंघवी ने एक प्रेस कांफ्रेंस में कहा, 'औपनिवेशिक मानसिकता वाला संदेश दिया गया है कि शासक और शासित के बीच एक दूरी होगी और इस कानून के जरिए गणतंत्र की नींव उखाड़ दी जाएगी। एक संदेश दिया गया है कि हम आम चुनाव से पहले इसका इस्तेमाल एकतरफा तरीके से विशेष तौर पर विपक्षी नेताओं के खिलाफ करेंगे।'
विधि आयोग ने राजद्रोह कानून का किया है समर्थन
दरअसल, विधि आयोग ने राजद्रोह के अपराध के लिए दंडात्मक प्रावधान का समर्थन करते हुए कहा है कि इसे पूरी तरह से खत्म कर देना से देश की सुरक्षा और अखंडता पर विपरीत प्रभाव डाल सकता है। लॉ कमीशन ने राजद्रोह के मामले में सजा को बढ़ाकर कम से कम तीन साल और अधिकतम सात साल करने की सलाह दी है।
विधि आयोग की सिफारिश भयानक, दुखद और जोखिम वाली-सिंघवी
राजद्रोह के तहत न्यूनतम सजा में अभी जुर्माने का प्रावधान है। राजद्रोह के मामले के लिए आईपीसी की धारा 124ए में प्रावधान है, जिसे मई, 2022 के सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के तहत अभी स्थगित रखा गया है। सिंघवी का कहना है कि भयानक, दुखद और जोखिम वाली बात है कि विधि आयोग ने सिफारिश की है कि आईपीसी की धारा 124ए को 'न सिर्फ बनाए रखना (चाहिए), बल्कि इसे और कठोर बना दिए जाए।'
औपनिवेशिक शासन की तुलना में और कठोर करने की योजना- कांग्रेस
कांग्रेस नेता ने आरोप लगाया कि 'बीजेपी सरकार अब इसे औपनिवेशिक शासन की तुलना में और भी कठोर, उग्र और घातक बनाने की योजना बना रही है।' सिंघवी का कहना है कि 'भारत के 22वें विधि आयोग ने सिफारिश की है कि आईपीसी की धारा 124ए, जिसके तहत राजद्रोह अपराध है, उसे कानून की किताब में कुछ और अधिक 'कठोर बदलावों' के साथ बनाए रखा जाना चाहिए।'
राजद्रोह के मामले में भयानक बढोतरी के दावे
कांग्रेस नेता ने दावा किया कि 2010 से 2014 की तुलना में 2014 से 2020 के बीच राजद्रोह के मामलों में सालाना 28 फीसदी की औसतन बढ़ोतरी दर्ज की गई। उन्होंने यहां तक दावा किया कि राजद्रोह के 12 मामले तो महामारी के दौरान वेंटिलेटर की कमी, भोजन के वितरण और प्रवासी मुद्दों पर सवाल उठाने वालों के खिलाफ दायर किए गए।
सिंघवी ने आरोप लगाया कि 'पत्रकारों के खिलाफ कुल 21 राजद्रोह के केस दर्ज किए गए। 2018 से उन्हें कृषि कानून, कोविड-19, हाथरस गैंग रेप, सिटीजनशिप पर रिपोर्ट के लिए और सरकार की आलोचना के लिए गिरफ्तार किया गया है।'
सिंघवी का आरोप है कि राजद्रोह के 27 मामले सिटीजनशिप कानून और एनआरसी का विरोध करने वालों और 8 मामले किसान आंदलोन को लेकर किए गए। उन्होंने बीजेपी शासित राज्यों में कांग्रेस सांसद शशि थरूर और कई वरिष्ठ पत्रकारों के खिलाफ भी राजद्रोह के केस दर्ज करने के आरोप लगाए।
सिर्फ विपक्ष को निशाना बनाने का दावा
उन्होंने यह भी दावा किया है कि राजद्रोह कानून का इस्तेमाल सिर्फ विपक्षी नेताओं और आलोचकों के खिलाफ किया गया है और सवाल पूछा है कि कितने बीजेपी नेताओं के खिलाफ इसके तहत मुकदमा दर्ज किया गया है। (इनपुट-पीटीआई)












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