वाराणसी में मोदी को हराने के लिये कांग्रेस बना रही है सीक्रेट प्लान, केजरीवाल भी शामिल

भले ही बसपा और सपा ने अपने उम्मीवारों की घोषणा कर दी है लेकिन इसका ये मतलब नहीं कि धर्मनिरपेक्ष दलों में अघोषित डील नहीं हुई है। सूत्रों के मुताबिक मोदी के लिए मुश्किलें खड़ी करने के इरादे से ही कांग्रेस उम्मीदवार घोषित करने में देरी कर रही है। कांग्रेस सूत्रों के अनुसार पार्टी की पसंद अजय राय और पूर्व सांसद राजेश मिश्रा के नाम पर टिक गई है। पार्टी यह जानते हुए कि घोषणा को लेकर दुविधा में है कि राय और मिश्रा में से जिस किसी को उम्मीदवार बनाया जाएगा उसे तैयारी के लिए वक्त की जरूरत होगी।
कांग्रेस, सपा और बसपा के बीच टैक्टिक समझौते की कोशिश इसलिए की गई ताकि सामाजिक समीकरणों अपने पक्ष में किया जाए। बसपा और सपा ने वाराणसी से वैश्य समुदाय के लोगों को उम्मीदवार बनाया है।
वाराणसी में वैश्य समुदाय के वोट काफी ज्यादा हैं। इस समुदाय को मोदी समर्थक माना जाता है। अरविंद केजरीवाल भी वैश्य हैं, इसलिए वह भी चुनाव मैदान में उतरे है। गैर भाजपा दलों ने मोदी के खिलाफ संयुक्त उम्मीदवार की मांग को ठुकरा दिया था क्योंकि वे यह नहीं दिखना चाहते थे कि कथित साम्प्रदायिक मोदी के खिलाफ उम्मीदवार उतारने से पीछे हट रहे हैं।
सूत्रों के अनुसार कांग्रेस वाराणसी से पार्टी उम्मीदवार तय करने पर जल्द ही चर्चा कर सकती है। कांग्रेस जातिगत समीकरणों को देखते हुए अजय राय और राजेश मिश्रा में से किसी एक को उतारने के पक्ष में है। राय की भूमिहार जाति में अच्छी पकड़ है। वाराणसी में भूमिहार समुदाय की अच्छी खासी संख्या है। मिश्रा ब्राह्मण समुदाय से आते हैं। वाराणसी में ब्राह्मण समुदाय की भी अच्छी खासी तादाद है। सूत्रों के मुताबिक वाराणसी में कांग्रेस का एक वर्ग चाहता था कि प्रियंका वाड्रा को मोदी के खिलाफ चुनाव लड़ाने पर पाटी नेतृत्व विचार करें क्योंकि जमीन पर वही मोदी को असल चुनौती दे सकती है।












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