नए बिल से सेक्शन 377 हटाया गया, पुरुषों से अप्राकृतिक यौन संबंध में अब सजा नहीं
केंद्र सरकार ने शुक्रवार को जो तीन नए विधेयक पेश किए हैं, उसमें आईपीसी के प्रावधानों में काफी बदला किया गया है। आईपीसी में जो एक बड़ा बदलाव प्रस्तावित है, उसके हिसाब से नए कानून में आईपीसी सेक्शन 377 हटा दिया गया है।
अगर यह प्रस्तावित विधेयक कानून का शक्ल अख्तियार करता है तो पुरुषों से अप्राकृतिक यौन संबंध अब अपराध नहीं माना जाएगा। प्रस्तावित कानून में यौन अपराध को एक आदमी के द्वारा महिला या बच्चे के खिलाफ अपराध के रूप में परिभाषित किया गया है, जैसे कि बलात्कार।

आईपीसी की धारा 377 क्या है?
आईपीसी के मौजूदा प्रावधान के तहत पुरुषों के खिलाफ यौन अपराध सेक्शन 377 के दायरे में आता है। आईपीसी की धारा 377 के अनुसार, 'जो कोई भी स्वेच्छा से प्रकृति की व्यवस्था के खिलाफ जाकर किसी पुरुष, महिला या जानवर के साथ यौन संबंध बनाता है, उसे उम्र कैद या किसी एक अवधि के लिए जेल की सजा से दंडित किया जाएगा, जिसे दस साल तक बढ़ाया जा सकता है; और जुर्माना भी लगाया जा सकता है।'
सुप्रीम कोर्ट ने धारा 377 को हटाया था
इससे पहले सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में एक फैसला देकर आईपीसी की धारा 377 को हटा दिया था। इसमें ये फैसला सुनाया गया था कि 'सहमति वाले वयस्कों' के बीच यौन संबंध एक अपराध नहीं होगा। यानी समलैंगिक यौन संबंध को अपराध की श्रेणी से हटा दिया जाएगा।
सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा था?
6 सितंबर,2018 को पांच सदस्यीय बेंच ने फैसला दिया था, 'सहमति से बनाए गए अप्राकृतिक यौन संबंध को अपराध मानने वाली धारा 377 अतार्किक, बचाव योग्य नहीं और स्पष्ट रूप से मनमानी है। समानता के अधिकार के उल्लंघन की वजह से इसे आंशिक रूप से रद्द कर दिया गया है।'
हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया था कि जानवरों और बच्चों के साथ अप्राकृतिक यौन संबंध से संबंधित धारा 377 के पहलू लागू रहेगी।












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