हमारा ध्यान अभी लोगों के टीकाकरण पर, बूस्टर डोज पर वैज्ञानिक साक्ष्यों की समीक्षा कर रहे हैं- HC से केंद्र
भारत सरकार ने मंगलवार को दिल्ली हाई कोर्ट को बताया कि अभी हमारा ध्यान योग्य आबादी का टीकाकरण करने पर है, बूस्टर डोज के बारे में अभी कोई निर्देश नहीं है। इस पर अध्ययन चल रहा है।
नई दिल्ली, 14 दिसंबर। भारत सरकार ने मंगलवार को दिल्ली हाई कोर्ट को बताया कि टीकाकरण नीति पर केंद्र को सलाह देने के लिए जिम्मेदार विशेषज्ञ समूह कोविड-19 के टीकों की खुराक देने के समय का वैज्ञानिक आकलन और बूस्टर डोज की आवश्यकता और औचित्य पर विचार कर रहा है। सरकार ने कहा कि नेशनल टेक्निकल इम्युनाइजेशन (एनटीएजीआई) और नेशनल एक्सपर्ट ग्रुप ऑन वैक्सीन एडमिनिस्ट्रेशन फॉर कोविड -19 (एनईजीवीएसी) दोनों भारत में सफल कोरोनावायरस संक्रमणों के आंकड़ों का विश्लेषण कर रहे हैं और जो वैक्सीन अभी लगनी वाकी हैं उनकी प्रभावकारिता का अध्ययन कर रहे हैं।

इसके अलावा कोरोना वैक्सीन के अतिरिक्त शॉट्स या बूस्टर खुराक के बारे में निर्णय जल्द लिए जाने की संभावना है। बता दें कि NTAGI और NEGVAC दो विशेषज्ञ निकाय हैं जो राष्ट्रीय कोविड-19 टीकाकरण कार्यक्रम का मार्गदर्शन करने के लिए मिलकर काम कर रहे हैं। सरकार ने कोर्ट को यह भी बताया कि वर्तमान में पूरी तरह से टीकाकरण करने वालों को बूस्टर डोज देने के लिए कोई दिशानिर्देश नहीं है। हमारा पूरा ध्यान अभी योग्य आबादी को वैक्सीन की दोनों डोज देने का है।
यह भी पढ़ें: ओमिक्रॉन के बढ़ते खतरे के बीच नॉर्वे ने की नए कोरोना प्रतिबंधों की घोषणा
Recommended Video
सरकार ने कोर्ट में दिए अपने हलफनामे में कहा कि भारत में कोरोना वैक्सीन द्वारा दी जाने वाली प्रतिरक्षा की अवधि के बारे में वर्तमान ज्ञान सीमित है और इसका पता स्पष्ट रूप से समय के साथ ही लगाया जा सकता है। केंद्र ने कोर्ट को बताया कि चूंकि कोविड-19 की जैविक विशेषताएं पूरी तरह से ज्ञात नहीं हैं, इसलिए कोविड -19 वैक्सीन की बूस्टर खुराक की उपयुक्तता और आवश्यकता पर फैसला होना बाकी है।
बता दें कि दिल्ली हाईकोर्ट ने केंद्र से कोविड-19 वैक्सीन के बूस्टर रोग से संबंधित पहलुओं पर जवाब दाखिल करने को कहा था। पश्चिम में बूस्टर डोज की बढ़ती वकालत को देखते हुए कोर्ट ने यह टिप्पणी की थी।












Click it and Unblock the Notifications