Scheduled Tribes Population: भारत में कितनी है आदिवासियों की असली आबादी? गृह राज्य मंत्री ने संसद में बताया
Scheduled Tribes Population: गृह मंत्रालय के राज्य मंत्री नित्यानंद राय ने लोकसभा में एक लिखित जवाब के दौरान भारत की अनुसूचित जनजाति (ST) की जनसंख्या से जुड़े महत्वपूर्ण आंकड़े साझा किए। 2011 की जनगणना के आंकड़ों का हवाला देते हुए उन्होंने बताया कि देश में अनुसूचित जनजातियों की कुल जनसंख्या 10,45,45,716 है।
उन्होंने स्पष्ट किया कि जनगणना के दौरान डेटा प्रत्येक राज्य और केंद्र शासित प्रदेश की अधिसूचित सूची के आधार पर एकत्र किया जाता है। हालांकि, सरकार की ओर से यह भी स्पष्ट किया गया है कि जनगणना में उप-जाति (Sub-tribe) वार आंकड़े अलग से प्रकाशित नहीं किए जाते हैं, बल्कि इन्हें अधिसूचित जनजातीय श्रेणियों के तहत ही संकलित किया जाता है।

अनुसूचित जनजाति की जनसंख्या
सरकार ने बताया कि 2011 की जनगणना के अनुसार, भारत में अनुसूचित जनजातियों की कुल जनसंख्या 10,45,45,716 है। यह डेटा राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों की अधिसूचित सूचियों के आधार पर एकत्र किया गया था। हालांकि, सरकार ने यह स्पष्ट कर दिया है कि जनगणना में उप-जातियों (Sub-tribes) के अनुसार अलग-अलग आंकड़े प्रकाशित नहीं किए जाते हैं। जनजातीय गणना केवल राज्य-वार और केंद्र शासित प्रदेश-वार अधिसूचित श्रेणियों के तहत ही संकलित की जाती है।
धार्मिक डेटा और वर्गीकरण
जनगणना 2011 में जनजातीय समुदायों के धार्मिक डेटा को 'ST-14' और 'ST-14A' तालिकाओं में वर्गीकृत किया गया है। ये तालिकाएँ राज्य, जिला और व्यक्तिगत जनजाति स्तर पर उपलब्ध हैं। इसमें मुख्य धर्मों के अलावा 'अन्य धर्म और मत' (Other Religions and Persuasions) का विवरण भी दिया गया है। सरकार के अनुसार, ये सभी आंकड़े सार्वजनिक रूप से जनगणना विभाग की आधिकारिक वेबसाइट पर उपलब्ध हैं, ताकि धार्मिक विविधता का स्पष्ट चित्र सामने आ सके।
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अलग 'आदिवासी धर्म' कॉलम की मांग
सांसद ने प्रश्न उठाया था कि क्या अलग 'आदिवासी धर्म' कॉलम न होने से आदिवासियों की पहचान प्रभावित हुई है। इसके उत्तर में सरकार ने कहा कि जनगणना में प्रगणक (Enumerator) वही धर्म या विश्वास दर्ज करता है जो उत्तरदाता द्वारा बताया जाता है। हालांकि सरकार ने स्वीकार किया है कि विभिन्न संगठनों से 'आदिवासी धर्म' के लिए एक अलग कॉलम बनाने के संबंध में कई प्रतिवेदन (Representations) प्राप्त हुए हैं, लेकिन वर्तमान ढांचे में स्व-घोषणा को ही आधार माना गया है।
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आगामी जनगणना 2027 की योजना
दस्तावेज़ के अनुसार, आगामी जनगणना 2027 में भी सरकार पुरानी प्रक्रिया को ही दोहराने का विचार कर रही है। इसमें प्रगणक उत्तरदाता द्वारा बताए गए धर्म, पंथ या विश्वास को ही रिकॉर्ड करेंगे। सरकार ने अभी तक किसी विशेष नए 'धर्म कॉलम' को जोड़ने की पुष्टि नहीं की है, बल्कि जोर दिया है कि नागरिकों को अपनी धार्मिक पहचान बताने की पूरी स्वतंत्रता होगी। विभिन्न राज्यों से मिली मांगों पर विचार करना एक प्रशासनिक प्रक्रिया का हिस्सा बना हुआ है।












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