PMLA पर SC का फैसला 'खतरनाक'! कांग्रेस, TMC,AAP समेत 17 विपक्षी दलों ने लगाई ये गुहार
नई दिल्ली, 3 अगस्त: ईडी को प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग ऐक्ट के तहत मिले अधिकारों को सुप्रीम कोर्ट की ओर से सही ठहराए जाने पर विपक्षी पार्टियां तिलमिला उठी हैं। विपक्षी नेताओं ने एक साझा बयान जारी कर कहा है कि सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले से सरकार का हाथ मजबूत होगा और वह विपक्षियों को निशाना बनाने के लिए इसे 'राजनीतिक हथकंडे' के रूप में इस्तेमाल करेगी। विपक्ष के नेताओं ने इसे 'खतरनाक' फैसला बताते हुए उम्मीद जताई है कि यह ज्यादा दिनों तक नहीं रहेगा।
Recommended Video

ईडी सुप्रीम कोर्ट के फैसले के खिलाफ विपक्ष एकजुट
कांग्रेस, टीएमसी और आम आदमी पार्टी जैसी कम से कम 17 विपक्षी दलों ने प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग ऐक्ट को लेकर सुप्रीम कोर्ट के हालिया फैसले को लेकर चिंता जताई है और इस फैसले पर पुनर्विचार की मांग की है। अपने फैसले में सुप्रीम कोर्ट ने पीएमएलए कानून की संवैधानिक वैद्यता को बरकरार रखा है। सुप्रीम ने पिछले हफ्ते पीएमएलए के तहत ईडी द्वारा आरोपियों की गिरफ्तारी, कुर्की, छापेमारी और जब्ती के अधिकारों पर मुहर लगाई थी। लेकिन, विपक्ष को सुप्रीम कोर्ट का भ्रष्टाचारियों के खिलाफ फौरी कार्रवाई करने के लिए ईडी के पक्ष में दिया गया यह फैसला रास नहीं आ रहा है।
विपक्ष को सुप्रीम कोर्ट का फैसला पसंद नहीं
इस मामले की सुनवाई के दौरान केंद्र ने सुप्रीम कोर्ट से कहा था, 'यह नहीं कहा जा सकता है कि किसी की बेगुनाही का अनुमान एक संवैधानिक गारंटी है।' अब विपक्षी नेताओं ने अपने साझा बयान में कहा है, 'हम सुप्रीम कोर्ट के हालिया फैसले के दीर्घकालीन परिणामों पर अपनी गहरी आशंका को पूरी तरह से कायम रखते हैं.......।' बयान में सुप्रीम कोर्ट के प्रति पूरा सम्मान जाहिर करते हुए राजनीतिक दलों ने कहा कि उन्हें लगता है कि फाइनेंस ऐक्ट के माध्यम से किए गए संशोधनों की संवैधानिकता पर बड़ी बेंच का फैसला आने तक इंतजार किया जाना चाहिए था।
कई विपक्षी दलों की टॉप लीडरशिप है इस कानून के घेरे में
इन विपक्षी दलों ने सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर गहरी निराशा जताते हुए कहा है कि उन्हें उम्मीद है कि यह 'खतरनाक' फैसला कम समय के लिए ही कायम रहेगा और जल्द ही संवैधानिक प्रावधान 'बहाल' होंगे। इस संयुक्त बयान पर हस्ताक्षर करने वालों में कांग्रेस, टीएमसी, डीएमके, आम आदमी पार्टी, एनसीपी, शिवसेना, सीपीएम, सीपीआई, इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग, आरएसपी, एमडीएमके, आरजेडी और आरएलडी शामिल हैं। गौरतलब है कि इनमें से ज्यादातर दलों के बड़े नेताओं पर प्रवर्तन निदेशालय का शिकंजा कसा हुआ है। कुछ जेल में हैं, कुछ से पूछताछ चल रही है और उनके ठिकानों पर छापे मारे जा रहे हैं और कुछ कोर्ट से किसी ना किसी तरह से जमानत लेकर बाहर घूम रहे हैं।
विपक्ष बता रहा है 'राजनीतिक प्रतिशोध' का हथियार
इससे पहले कांग्रेस ने पीएमएलए के कुछ प्रावधानों की संवैधानिक वैद्यता बरकार रखने के सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर कहा था कि इसका भारतीय लोकतंत्र पर दूरगामी असर पड़ेगा और सरकार को 'राजनीतिक प्रतिशोध' निकालने का हथियार मिल जाएगा। कांग्रेस की टॉप लीडरशिप भी इसी कानून के तहत ईडी की कार्रवाई से परेशान है। (पीटीआई के इनपुट के साथ)












Click it and Unblock the Notifications