अवमानना के दोषी पाए गए तो रैनबैक्सी के पूर्व प्रमोटर्स को भेजेंगे जेल: सुप्रीम कोर्ट

नई दिल्ली। दवा-निर्माण के क्षेत्र में दुनिया की जानी-मानी कंपनी रैनबैक्सी के पूर्व प्रमोटर्स मलविंदर और शिविंदर सिंह के खिलाफ अवमानना याचिका पर सुनवाई को सुप्रीम कोर्ट राजी हो गया है। सीजेआई रंजन गोगोई की अध्यक्षता वाली बेंच ने कहा कि मलविंदर और शिविंदर सिंह के खिलाफ अवमानना याचिका पर 11 अप्रैल को सुनवाई होगी। कोर्ट ने कहा कि अगर वे दोषी पाए गए तो अदालत उन्हें जेल भेजेगी।

SC to hear the contempt petition against former Ranbaxy owners Malvinder and Shivinder Singh

सुप्रीम कोर्ट ने इसके पहले, 14 मार्च को कहा था कि शिविंदर और मलविंदर जापान की दवा कंपनी दाइची सैंक्यो को 4,000 करोड़ रुपए के भुगतान की योजना को पेश करें। जापानी कंपनी 4000 करोड़ रुपए के आर्बिट्रेशन अवॉर्ड को लागू करवाने के लिए कोर्ट पहुंची है। सिंगापुर ट्रिब्यूनल में उसने 2016 में केस जीता था।

दाइची ने साल 2008 में रैनबैक्सी को खरीदा था। बाद में कंपनी ने आरोप लगाया कि मलविंदर और शिविंदर ने रैनबैक्सी के बारे में अहम जानकारियां नहीं दी। कंपनी ने इसकी शिकायत सिंगापुर ट्रिब्यूनल में की थी। कोर्ट ने कहा कि अगर इस मामले में कोर्ट के किसी आदेश की अवमानना का दोषी पाया गया तो पूर्व प्रमोटर्स को जेल भेज दिया जाएगा।

सुप्रीम कोर्ट की इस बेंच में सीजेआई रंजन गोगोई के अलावा जस्टिस दीपक गुप्ता और जस्टिस संजीव खन्ना भी शामिल थे। बेंच ने कहा, ' हो सकता है कि आप आधी दुनिया के मालिक हों लेकिन आपके पास इस बारे में कोई ठोस प्लान नहीं है कि आप पंचाट के फैसले की राशि कहां से जुटाएंगे। आपने कहा कि किसी के पास आपके 6 हजार करोड़ रु बकाया हैं। लेकिन ये राशि ना ही यहां हैं, और ना हीं वहां।'

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