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सेना में भेदभाव पर सख्त सुप्रीम कोर्ट, कहा- अगर महिलाओं का प्रमोशन नहीं करते तो पुरुषों का भी रुकना चाहिए

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Promotion in Army: सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को सेना के द्वारा महिला और पुरुषों के बीच किए जा रहे भेदभाव पर सख्त नाराजगी जाहिर की है। दरअसल सेना के अधिकारियों ने सेलेक्शन बोर्ड का गठन किया, जोकि पुरुष अधिकारियों को कर्नल रैंक पर प्रमोशन देने के लिए गठित किया गया था, लेकिन महिला अधिकारियों के प्रमोशन के लिए ऐसा नहीं किया गया, जिसपर सुप्रीम कोर्ट ने नाराजगी जाहिर की। सेना के इस फैसले पर नाराजगी जाहिर करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को निर्देश दिया है कि वह बताए कि महिला अधिकारियों को प्रमोशन देने के लिए क्या कदम उठा रही है।

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    Army में महिला-पुरुषों के बीच भेदभाव, Supreme Court सख्त | वनइंडिया हिंदी |*News
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    जूनियर पुरुष अधिकारियों का प्रमोशन

    बता दें कि 34 महिला अधिकारियों ने सुप्रीम कोर्ट में इसको लेकर याचिका दायर की थी। इन महिलाओं की ओर से कोर्ट में पैरवी के लिए पेश हुए एडवोकेट वी मोहना ने आरोप लगाया कि जो पुरुष अधिकारी महिला अधिकारियों से जूनियर रहैं, उन्हें प्रमोट किया जा रहा है जोकि सुप्रीम कोर्ट के आदेश का सीधा उल्लंघन है, जिसमे कोर्ट ने कहा है कि महिलाओं के लिए स्थायी कमीशन का गठन हो और उन्हें इसका लाभ दिया जाए। लेकिन महिला अधिकारियों के लिए ऐसा नहीं किया गया। जिसपर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार से दो हफ्ते के भीतर जवाब देने को कहा है कि महिलाओं के लिए स्थायी कमीशन को लेकर क्या कदम उठाए जा रहे हैं।

    महिलाओं के लिए आजतक नहीं हुआ स्थायी कमीशन का गठन
    जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ के 2020 और 2021 के आदेश का हवाला देते हुए एडवोकेट ने कहा कि महिला अधिकारियों को स्थायी कमीशन देने का आदेश दिया गया था, लेकिन महिला अधिकारियों को गलत तरह से पढ़ाई के लिए छुट्टी नहीं दी गई, उन्हें डेप्युटेशन नहीं दिया गया। महिलाएं अभी भी अपरोक्ष रूप से इस लिंगभेदी भेदभाव का शिकार हो रही हैं। एडवोकेट ने कहा कि सेना के अधिकारियों ने ऐलान किया था कि 24 मार्च 2021 के सुप्रीम कोर्ट के आदेश का पालन करने के लिए स्पेशल सेलेक्शन बोर्ड का गठन किया जाएगा। लेकिन आजतक इस तरह के किसी भी सेलेक्शन बोर्ड का गठन नहीं किया गया, लेकिन पुरुषों को प्रमोशन देने के लिए दो बोर्ड का गठन किया गया।

    पुरुष अधिकारियों का भी प्रमोशन रोक दीजिए
    चीफ जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ की अध्यक्षता वाली बेंच ने इस पूरे मामले का गंभीरता से संज्ञान लिया है। कोर्ट ने वरिष्ठ वकील आर बालासुब्रमण्यमन जो केंद्र सरकार की ओर से कोर्ट में पेश हुए, उनसे कहा, अगर ऐसा है तो कर्नल रैंक पर प्रमोशन करने के लिए पुरुषों के लिए जो बोर्ड बनाया गया है उसे भी रोक दिया जाना चाहिए। जिसपर बालासुब्रमण्यन ने भरोसा दिलाया कि 150 पदों पर कर्नल के प्रमोशन की प्रक्रिया आखिरी स्टेज पर है, एक बार जब यह पूरा हो जाएगा तो तो ये महिला अधिकारी इस पद पर प्रमोट होने के लिए अर्ह हो जाएंगी। एडवोकेट ने भरोसा दिलाया कि महिला अधिकारियों के साथ कुछ भी गलत नहीं होगा।

    महिला अधिकारियों ने खटखटाया था सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा
    बता दें कि महिला अधिकारियों की ओर से सुप्रीम कोर्ट में जो याचिका दायर की गई है उसमे अधिकतर महिलाएं वो हैं जिन्होंने 1992 से 2007 के बीच सेना में नौकरी हासिल की है। महिला अधिकारियों का आरोप है कि हमारे प्रमोशन को दरकिनार कर जूनियर पुरुष अधिकारियों को प्रमोशन दिया जा रहा है। सुप्रीम कोर्ट के ऐतिहासिक फैसले के तीन साल के बाद महिला अधिकारियों की ओर से यह याचिका दायर की गई है। फरवरी 2020 में सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को आदेश दिया था कि सेना में महिलाओं के प्रमोशन के लिए स्थायी कमीशन का गठन किया जाए।

    Comments
    English summary
    SC goes hard on centre on army promotion says If you dont promote women then hold men too
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